8वें वेतन आयोग की लखनऊ में एंट्री, वेतन भत्तों और पेंशन पर होगी चर्चा; टिकी लाखों कर्मचारियों की निगाहें
आठवें वेतन आयोग की टीम सोमवार से दो दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंचेगी. आयोग राज्य सरकार के अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों से मुलाकात कर वेतन, भत्तों, पेंशन और अन्य सेवा संबंधी मुद्दों पर सुझाव लेगा. कर्मचारी संगठनों ने आयोग से व्यापक चर्चा की मांग की है.
उत्तर प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों और बिजली विभाग के कर्मचारियों की निगाहें आठवें वेतन आयोग की लखनऊ यात्रा पर टिकी हुई हैं. आयोग की टीम सोमवार को राजधानी पहुंचेगी और दो दिनों तक विभिन्न विभागों तथा कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें करेगी. इस दौरे को कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है क्योंकि आयोग की सिफारिशों का असर राज्य के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों पर पड़ने वाला है.
वित्त विभाग के साथ होगी विस्तृत चर्चा
जानकारी के अनुसार आयोग की टीम सबसे पहले वित्त विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करेगी. इस दौरान यह आकलन किया जाएगा कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने पर राज्य सरकार पर कितना अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा. अधिकारियों की ओर से वर्तमान वेतन व्यय, पेंशन भुगतान, भत्तों और अन्य वित्तीय दायित्वों से जुड़ी जानकारी आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी.
बैठकों में वेतन संरचना, फिटमेंट फैक्टर, वार्षिक वेतन वृद्धि, विभिन्न पे स्केल और भत्तों से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी. कर्मचारी संगठनों की ओर से महंगाई भत्ता, आवास किराया भत्ता, यात्रा भत्ता, शैक्षिक भत्ता, अतिरिक्त कार्य भत्ता और उत्कृष्ट सेवा भत्ता जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी की गई है. इसके अलावा कर्मचारियों की पदोन्नति, कैडर प्रबंधन और सेवा शर्तों से जुड़े विषय भी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं.
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पुरानी पेंशन योजना का मुद्दा भी रहेगा प्रमुख
कई कर्मचारी संगठन आयोग के समक्ष पुरानी पेंशन योजना की बहाली का मुद्दा भी उठाने वाले हैं. कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. इसके साथ ही सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों और पेंशन व्यवस्था में सुधार को लेकर भी सुझाव दिए जाएंगे.
कुछ कर्मचारी संगठनों ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि आयोग की बैठकों में सभी वर्गों के कर्मचारियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है. बिजली विभाग और राज्य कर्मचारियों के संगठनों का कहना है कि आयोग की सिफारिशों का सीधा असर उन पर पड़ेगा, इसलिए उनके विचारों को भी विस्तार से सुना जाना चाहिए.
आउटसोर्स कर्मचारियों के मुद्दे भी उठेंगे
कर्मचारी संगठनों ने विशेष रूप से आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि बड़ी संख्या में कर्मचारी संविदा व्यवस्था के तहत काम कर रहे हैं, जिनकी समस्याओं पर भी आयोग को ध्यान देना चाहिए. आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का असर केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा. उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में वेतन संशोधन केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर लागू किए जाते हैं. इसी कारण राज्य के कर्मचारी और पेंशनर आयोग की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं. आने वाले समय में आयोग की सिफारिशें लाखों परिवारों की आर्थिक स्थिति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती हैं.