उत्तराखंड में स्मार्ट मीटर पर नया फॉर्मूला, उपभोक्ता की सहमति के बिना नहीं हटेगा पुराना मीटर; साथ-साथ चलेंगे दोनों मीटर
उत्तराखंड ऊर्जा निगम ने स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की आशंकाओं को दूर करने के लिए नई व्यवस्था लागू की है. अब नया स्मार्ट मीटर लगाने के बाद पुराना मीटर तुरंत नहीं हटाया जाएगा. दोनों मीटर एक साथ चलेंगे और उपभोक्ता रीडिंग का मिलान कर संतुष्ट होने के बाद ही पुराने मीटर को हटाने की अनुमति देंगे.
उत्तराखंड में स्मार्ट मीटर को लेकर चल रहे विरोध और उपभोक्ताओं की शंकाओं के बीच ऊर्जा निगम ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. अब बिजली उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर तो अनिवार्य रूप से लगाए जाएंगे, लेकिन नया मीटर लगने के साथ पुराना मीटर तत्काल नहीं हटाया जाएगा.
नए आदेश के मुताबिक दोनों मीटर कुछ समय तक समानांतर रूप से संचालित किए जाएंगे, ताकि उपभोक्ता स्वयं उनकी रीडिंग का मिलान कर सकें और पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही पुराने मीटर को हटाने की सहमति दें. ऊर्जा निगम का मानना है कि इस नई व्यवस्था से स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों के मन में व्याप्त भ्रम और अविश्वास दूर होगा तथा मीटर बदलने की प्रक्रिया में तेजी आएगी.
'डबल मीटर' व्यवस्था से दूर होगी उपभोक्ताओं की चिंता
स्मार्ट मीटर को लेकर कई उपभोक्ताओं के मन में यह आशंका रही है कि नए मीटर तेज रीडिंग दर्ज करते हैं, जिससे बिजली बिल अधिक आ सकता है. इसी भ्रम को दूर करने के लिए ऊर्जा निगम ने 'डबल मीटर' व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है. इस व्यवस्था के तहत नया स्मार्ट मीटर लगाने के बाद पुराना मीटर भी चालू रहेगा. एक से दो महीने तक दोनों मीटर एक साथ कार्य करेंगे. इस दौरान स्मार्ट मीटर से तैयार होने वाले पहले या दूसरे बिजली बिल की तुलना उपभोक्ता पुराने मीटर की रीडिंग से कर सकेंगे. यदि दोनों मीटरों की गणना समान और संतोषजनक पाई जाती है, तभी उपभोक्ता की सहमति से पुराने मीटर को हटाया जाएगा.
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उपभोक्ता की मंजूरी के बाद ही हटेगा पुराना मीटर
ऊर्जा निगम ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. किसी भी उपभोक्ता का पुराना मीटर उसकी सहमति के बिना नहीं हटाया जाएगा. निगम का उद्देश्य लोगों का विश्वास जीतना और उन्हें यह भरोसा दिलाना है कि स्मार्ट मीटर की रीडिंग पूरी तरह सही और विश्वसनीय है. अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से उपभोक्ताओं को स्वयं मीटर की कार्यप्रणाली समझने का अवसर मिलेगा और अनावश्यक भ्रम समाप्त होगा. दोनों मीटरों को साथ चलाने की व्यवस्था इसलिए बनाई गई है, ताकि लोग स्वयं रीडिंग का मिलान कर सकें और किसी प्रकार की शंका न रहे.