मां ने बेची सब्जियां, बेटे ने निकाला NEET! 655 अंक लाकर चमोली के अनुराग ने रच दिया इतिहास
चमोली के कर्णप्रयाग निवासी अनुराग पुरोहित ने नीट परीक्षा में 655 अंक और ऑल इंडिया 1202वीं रैंक हासिल की है. सब्जी बेचकर परिवार चलाने वाली मां की मेहनत और अनुराग की लगन ने सफलता की नई मिसाल पेश की.
उत्तराखंड के चमोली जिले से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है. सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अनुराग पुरोहित ने नीट परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 655 अंक प्राप्त किए हैं. उनकी सफलता के पीछे मां का संघर्ष, आत्मविश्वास और लगातार की गई मेहनत सबसे बड़ी ताकत बनी.
संघर्ष के बीच मिली बड़ी सफलता
कर्णप्रयाग के बरसाली गांव के रहने वाले अनुराग पुरोहित ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में 720 में से 655 अंक हासिल कर ऑल इंडिया स्तर पर 1202वीं रैंक प्राप्त की है. उनका लक्ष्य अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से एमबीबीएस की पढ़ाई करना है. खास बात यह है कि वह वर्तमान में देहरादून मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र हैं, लेकिन बेहतर संस्थान में प्रवेश पाने के लिए उन्होंने दोबारा परीक्षा देने का फैसला किया और मेहनत रंग लाई.
मां के संघर्ष ने बढ़ाया हौसला
अनुराग का परिवार सामान्य मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि से आता है. उनके पिता अशोक पुरोहित का निधन हो चुका है. इसके बाद उनकी मां गीता देवी ने सब्जी की दुकान चलाकर परिवार की जिम्मेदारी संभाली. उन्होंने अपने दोनों बच्चों की पढ़ाई में किसी तरह की कमी नहीं आने दी. अनुराग अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय मां की मेहनत, त्याग और प्रेरणा को देते हैं. उनकी छोटी बहन भी अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए है.
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सेल्फ स्टडी बनी सफलता की कुंजी
अनुराग ने बताया कि उन्होंने हमेशा सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया. पढ़ाई के लिए उन्होंने किताबों के साथ ऑनलाइन माध्यमों से भी जरूरी मार्गदर्शन लिया. उन्होंने अब तक चार बार नीट परीक्षा दी, जिनमें दो बार सफलता हासिल की. उनका मानना है कि निरंतर अभ्यास, अनुशासन और धैर्य किसी भी कठिन परीक्षा में सफलता दिला सकते हैं. यही सोच उन्हें लगातार बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करती रही.
विद्यालय और क्षेत्र में खुशी का माहौल
अनुराग की उपलब्धि से उनके विद्यालय और पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है. श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल, कर्णप्रयाग के प्रधानाचार्य बीबी डोभाल ने कहा कि अनुराग ने अपने परिवार के साथ-साथ विद्यालय और जिले का नाम भी रोशन किया है. उनकी सफलता उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करते हैं.