केदारनाथ मार्ग पर बारिश और भूस्खलन के बीच फंसे श्रद्धालु, SDRF-NDRF ने ऐसे बचाई 10 हजार से ज्यादा तीर्थयात्रियों जान
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में भारी बारिश के कारण केदारनाथ मार्ग पर भूस्खलन हो गया, जिससे 10,450 श्रद्धालु फंस गए. SDRF और NDRF की संयुक्त टीमों ने सभी यात्रियों को सुरक्षित निकालकर हाईवे को दोबारा चालू कराया.
देहरादून: SDRF और NDRF की संयुक्त टीमों ने उत्तराखंड में केदारनाथ मार्ग पर फंसे 10,450 तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाला. भारी बारिश के कारण मुनकटिया में हुए भूस्खलन से सोनप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे बंद हो गया था. बारिश, चट्टानें गिरने और कम विजिबिलिटी के बावजूद बचाव टीमों ने यात्रियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया.
JCB मशीनों की मदद से मलबा हटाया गया और जल्द ही ट्रैफिक बहाल कर दिया गया. अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में केदारनाथ मार्ग पर मुनकटिया में अचानक हुए भूस्खलन के बाद, संयुक्त बचाव टीमों ने वहां फंसे तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया.
अधिकारियों ने क्या बताया?
अधिकारियों के अनुसार यह भूस्खलन मंगलवार देर रात सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच हुआ था, जिसका कारण क्षेत्र में हुई भारी बारिश थी. मलबे ने मुख्य हाईवे को अवरुद्ध कर दिया था, जिससे बड़ी संख्या में तीर्थयात्री वहां फंस गए थे.
लगातार चट्टानें गिरने, भारी बारिश, अंधेरे और पहाड़ी इलाके की मुश्किल परिस्थितियों ने फंसे हुए यात्रियों के लिए बेहद कठिन हालात पैदा कर दिए थे.
क्या लिया गया एक्शन?
रुद्रप्रयाग के जिला नियंत्रण कक्ष यानी DCR ने रात 9:16 बजे राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल यानी SDRF को अलर्ट किया. सोनप्रयाग से एक बचाव टीम तुरंत आवश्यक उपकरणों के साथ घटनास्थल पर पहुंची. इसके बाद SDRF और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल यानी NDRF ने मिलकर एक संयुक्त राहत और बचाव अभियान शुरू किया.
संयुक्त टीमों ने फंसे हुए 10,450 तीर्थयात्रियों को प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकाला. लगातार बारिश और कम विजिबिलिटी के बावजूद बचाव कर्मियों ने तीर्थयात्रियों का मनोबल बनाए रखा.
कैसे किया गया बचाव?
बचाव टीमों ने सुरक्षित निकाले गए तीर्थयात्रियों को निर्धारित सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया. बचाव अभियान पूरा होने के बाद अधिकारियों ने जमा हुए मलबे को हटाने के लिए JCB मशीनें तैनात कीं.
SDRF के कमांडेंट ने क्या बताया?
प्रशासन ने जल्द ही हाईवे को बहाल कर दिया और वाहनों की आवाजाही सामान्य रूप से फिर से शुरू हो गई. SDRF के कमांडेंट अर्पण यदुवंशी ने बताया कि तीर्थयात्रा मार्ग पर तैनात टीमें पूरी तरह से अलर्ट थीं.
यदुवंशी ने आगे कहा कि इस अग्रिम तैनाती के कारण त्वरित प्रतिक्रिया देना और प्रभावी समन्वय स्थापित करना संभव हो पाया. अधिकारी ने बताया कि कर्मचारियों ने मलबा हटा दिया, जिससे मार्ग पर बना अवरोध दूर हो गया और वहां फंसे हुए वाहन उस क्षेत्र से आगे निकल गए.