पिथौरागढ़: उत्तराखंड के पहाड़ी जिले में स्थित मां चंडिका धुरा मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खास आस्था का केंद्र है. यह मंदिर देवी महाकाली को समर्पित माना जाता है. मां चंडिका को मां दुर्गा का ही एक रूप माना गया है. धार्मिक मान्यताओं में उन्हें न्याय की देवी भी कहा जाता है. ऐसी मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से अपनी फरियाद लेकर देवी के दरबार में पहुंचते हैं, उनकी मनोकामना पूरी होती है.
मंदिर से जुड़ी मान्यता करीब 400 साल पुरानी बताई जाती है. कहा जाता है कि उस समय मां चंडिका का मंदिर बुंगाछीना के हरदेव में हुआ करता था. उसी क्षेत्र में मां महानंदा देवी का मंदिर भी है. धार्मिक कथा के अनुसार, मां चंडिका और मां महानंदा को बहनें माना जाता है. चंडिका की मांसाहार प्रवृत्ति के कारण मां नंदा ने उन्हें वह स्थान छोड़ने का आदेश दिया था.
मान्यता के अनुसार, स्थान छोड़ने के बाद मां चंडिका रामगंगा नदी में बहते हुए उस जगह पहुंचीं, जहां आज चंडिका घाट मंदिर स्थित है. उस समय गांव के लोगों ने नदी से देवी की मूर्ति को बाहर निकाला और उसे एक साफ स्थान पर रख दिया. इसके बाद कुछ ऐसा हुआ, जिसे ग्रामीण देवी की इच्छा से जोड़कर देखते हैं.
पिथौरागढ़ स्थित माँ चंडिका धुरा मंदिर देवी महाकाली को समर्पित आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है। आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण यह पावन स्थल अपनी अनुपम प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है।
पिथौरागढ़ आगमन पर इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें। pic.twitter.com/o51KkjYAg4— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) September 11, 2026Also Read
पिथौरागढ़ स्थित माँ चंडिका धुरा मंदिर देवी महाकाली को समर्पित आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है। आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण यह पावन स्थल अपनी अनुपम प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है।
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) September 11, 2026
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बताया जाता है कि देवी की मूर्ति को उस स्थान से दूसरी जगह ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन वह वहां से हिल नहीं सकी. ग्रामीणों के लिए यह घटना बेहद असामान्य थी. इसके बाद मंदिर से जुड़ी मान्यता और भी मजबूत हो गई. लोगों ने इसे देवी के इसी स्थान पर रहने की इच्छा के रूप में देखा.
कहा जाता है कि इसके बाद मां चंडिका ने गांव के एक व्यक्ति को सपने में दर्शन दिए. देवी ने उसे बताया कि वह इसी स्थान पर रहेंगी. इसके बाद ग्रामीणों ने मूर्ति को वहीं स्थापित मानकर पूजा अर्चना शुरू कर दी. तभी से यह स्थान मां चंडिका की आराधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है.
मां चंडिका को यहां केवल शक्ति के स्वरूप में ही नहीं, बल्कि न्याय की देवी के रूप में भी पूजा जाता है. मान्यता है कि भक्त अपनी परेशानियां और मन की फरियाद लेकर देवी के दरबार में आते हैं. श्रद्धालुओं की आस्था है कि मां चंडिका उनकी पुकार सुनती हैं और उन्हें न्याय दिलाती हैं.
पिथौरागढ़ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मां चंडिका धुरा मंदिर धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक सुंदरता का भी अनुभव कराता है. मंदिर का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा माना जाता है. यही वजह है कि यह स्थान स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.