menu-icon
India Daily

'नौकरी खत्म होते ही...', ग्रेस पीरियड खत्म करने की तैयारी में ट्रंप; H-1B वीजा धारकों की बढ़ेगी मुसीबत

अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने H-1B और अन्य अस्थायी वर्क वीजा धारकों के लिए नौकरी छूटने के बाद मिलने वाली 60 दिन की ग्रेस पीरियड समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है. इससे भारतीय आईटी पेशेवर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे.

shanu
Edited By: Shanu Sharma
'नौकरी खत्म होते ही...', ग्रेस पीरियड खत्म करने की तैयारी में ट्रंप; H-1B वीजा धारकों की बढ़ेगी मुसीबत
Courtesy: AI

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने कानूनी प्रवासन नियमों को और सख्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है. रिपोर्ट के अनुसार, होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने उस 60 दिन की छूट अवधि को खत्म करने का प्रस्ताव दिया है, जो H-1B वीजा सहित कुछ अस्थायी वर्क वीजा धारकों को नौकरी छूटने के बाद भी अमेरिका में रहने और नया नियोक्ता खोजने की अनुमति देती थी.

फेडरल रजिस्टर में गुरुवार को प्रकाशित इस प्रस्ताव के मुताबिक, अब H-1B और संबंधित वीजा वाले विदेशी कर्मचारियों को नौकरी खत्म होते ही अमेरिका छोड़ना होगा. उन्हें दूसरा स्पॉन्सर ढूंढने या घर-परिवार की व्यवस्था निपटाने के लिए पहले मिलने वाला 60 दिन का समय नहीं मिलेगा. यह ग्रेस पीरियड 2017 से लागू थी और कर्मचारियों को नई नौकरी तलाशने या व्यवस्थित तरीके से देश छोड़ने का मौका देती थी.

भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा असर

इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रभाव भारतीय प्रौद्योगिकी पेशेवरों पर पड़ने की संभावना है. अमेरिका के टेक और सर्विस सेक्टर में काम करने वाले H-1B धारकों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इंफोसिस, एचसीएलटेक और एलटीआईमाइंडट्री जैसी प्रमुख भारतीय आईटी कंपनियां तथा डेलॉइट, पीडब्ल्यूसी और अर्न्स्ट एंड यंग जैसी कंसल्टेंसी फर्में बड़े पैमाने पर इन वीजा को स्पॉन्सर करती हैं. बेरार्डी इमिग्रेशन लॉ के वकीलों का कहना है कि इससे कंपनियों की एचआर टीमों के पास ले-ऑफ और ऑफ-बोर्डिंग प्रक्रिया संभालने का समय काफी कम हो जाएगा.

प्रवासियों के खिलाफ ट्रंप प्रशासन के सख्त तेवर

ट्रंप प्रशासन दूसरी बार सत्ता में लौटने के बाद से कानूनी माइग्रेशन को सख्त करने की नीति पर आगे बढ़ रहा है. पहले वीजा फीस बढ़ाई जा चुकी है और कुछ समय के लिए इमिग्रेंट वीजा अपॉइंटमेंट भी रोके गए थे. विभाग ने माना है कि कंपनियों को कुछ व्यावहारिक दिक्कतें हो सकती हैं, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि खाली पदों पर अमेरिकी कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जा सकती है. यदि कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को रखना चाहती हैं तो उन्हें या तो समान योग्यता वाले अमेरिकी उम्मीदवारों को नियुक्त करना होगा या आई-129 पिटीशन प्रक्रिया अपनानी होगी. प्रशासन इसे लागू करने से पहले दो महीने तक जनता की राय लेगा. भारतीय पेशेवरों और कंपनियों के लिए यह प्रस्ताव चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि नौकरी छूटने की स्थिति में उनके पास अब बेहद सीमित विकल्प बचेंगे.