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कुंभ 2027 से पहले हरिद्वार में बड़ा बदलाव, 31 करोड़ की योजना से चमकेगा पूरा शहर

कुंभ 2027 को लेकर हरिद्वार में तैयारियां तेज हो गई हैं. बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए 31.54 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी मिली है. इससे ट्रांसमिशन नेटवर्क मजबूत होगा और मेले के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी.

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Edited By: Babli Rautela
कुंभ 2027 से पहले हरिद्वार में बड़ा बदलाव, 31 करोड़ की योजना से चमकेगा पूरा शहर
Courtesy: Social Medi

हरिद्वार में वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले कुंभ मेले की तैयारियां अभी से तेज हो गई हैं. करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना को मंजूरी दे दी है. इस योजना पर 31.54 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे आने वाले वर्षों में हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति अधिक भरोसेमंद और मजबूत हो सकेगी.

कुंभ मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं. ऐसे में बिजली की मांग सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है. इसी को ध्यान में रखते हुए ट्रांसमिशन नेटवर्क के आधुनिकीकरण का फैसला लिया गया है.

पुराने कंडक्टरों की जगह लगाए जाएंगे आधुनिक कंडक्टर

मंजूर की गई परियोजना के तहत 132 केवी ज्वालापुर रुड़की और 132 केवी सिडकुल ज्वालापुर लाइन में पुराने कंडक्टरों को बदलकर हाई टेम्परेचर लो सैग कंडक्टर लगाए जाएंगे. यह नई तकनीक बिजली वहन क्षमता बढ़ाने के साथ साथ ट्रांसमिशन प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाएगी. विशेषज्ञों के अनुसार इन आधुनिक कंडक्टरों की मदद से बिजली की आपूर्ति बिना बाधा के जारी रखी जा सकेगी और बढ़ते भार का सामना करना आसान होगा.

रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना

पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड ने आयोग के समक्ष बताया कि कुंभ 2027 में श्रद्धालुओं की संख्या रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती है. इसके अलावा हरिद्वार क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों और शहरी विस्तार के कारण भी बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है. सिडकुल, बहादराबाद और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है. इससे मौजूदा बिजली ढांचे पर दबाव बढ़ता जा रहा है. ऐसे में समय रहते नेटवर्क को मजबूत करना जरूरी माना गया.

पांच दशक पुरानी लाइनें बन रही थीं चुनौती

वर्तमान में उपयोग की जा रही कई ट्रांसमिशन लाइनें लगभग पांच दशक पुरानी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ये लाइनें भविष्य की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं होंगी. बताया गया है कि सिडकुल ज्वालापुर और ज्वालापुर रुड़की ट्रांसमिशन लाइनें पहले से ही अपनी कुल क्षमता के 90 प्रतिशत से अधिक भार पर संचालित हो रही हैं. आने वाले वर्षों में इन पर दबाव और बढ़ने की संभावना है.

नई परियोजना के तहत लगाए जाने वाले हाई टेम्परेचर लो सैग कंडक्टरों की मदद से ट्रांसमिशन लाइनों की बिजली वहन क्षमता लगभग ढाई गुना तक बढ़ सकती है. इससे न केवल कुंभ मेले के दौरान बल्कि भविष्य में भी क्षेत्र की बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी. इस परियोजना के पूरा होने के बाद हरिद्वार में बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर और भरोसेमंद होगी. साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों और तेजी से बढ़ती आबादी को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा.