करीब छह वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भारत और चीन के बीच सीमांत व्यापार एक बार फिर शुरू होने जा रहा है. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से भारतीय व्यापारियों का पहला दल सात जुलाई को तिब्बत के तकलाकोट के लिए रवाना होगा. इस फैसले से सीमांत क्षेत्र के व्यापारियों में उत्साह का माहौल है. लंबे समय बाद तकलाकोट की मंडी में एक बार फिर भारतीय उत्पादों की दुकानें सजेंगी और व्यापारिक गतिविधियां शुरू होंगी.
व्यापार विभाग के अनुसार आठ व्यापारियों का पहला दल रविवार को धारचूला से भारतीय मंडी गुंजी के लिए रवाना होगा. गुंजी पहुंचने के बाद सभी व्यापारियों की सीमा शुल्क और अन्य आवश्यक जांच की जाएगी. इसके बाद सात जुलाई को यह दल तिब्बत के तकलाकोट के लिए प्रस्थान करेगा. प्रशासन का कहना है कि सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद व्यापारियों को सीमापार व्यापार की अनुमति दी जाएगी.
भारत चीन सीमांत व्यापार शुरू होने के साथ ही व्यापारियों की ओर से आवेदन भी तेजी से किए जा रहे हैं. अब तक व्यापारियों और उनके सहायकों की ओर से कुल 134 आवेदन प्राप्त हुए हैं. इनमें 49 व्यापारियों और 44 सहायकों को ट्रेड पास जारी किए जा चुके हैं. वहीं 41 आवेदनों को सत्यापन के लिए देहरादून भेजा गया है. शनिवार को भी 20 व्यापारियों और सहायकों ने नए ट्रेड पास के लिए आवेदन किया.
इस बार तकलाकोट में भारत और नेपाल के व्यापारियों के लिए नई मंडी तैयार की गई है. अगले सप्ताह तक भारतीय व्यापारियों की दुकानें यहां पूरी तरह सज जाएंगी. व्यापारियों को उम्मीद है कि लंबे अंतराल के बाद शुरू हो रहा यह व्यापार सीमांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा. पौनी पोटर्स के 19 पास भी जारी किए जा चुके हैं, जिससे सामान की ढुलाई और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी.
भारत और चीन के बीच सीमांत व्यापार केवल व्यापारियों के लिए ही नहीं बल्कि सीमांत क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. व्यापार शुरू होने से परिवहन, होटल, मजदूरी और स्थानीय कारोबार से जुड़े लोगों को भी रोजगार के नए अवसर मिलेंगे. व्यापारियों का कहना है कि छह साल बाद फिर से तकलाकोट की मंडी में भारतीय वस्तुओं की मांग बढ़ने की उम्मीद है. इससे सीमांत क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां भी तेज होंगी और स्थानीय व्यापार को नया सहारा मिलेगा.