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उत्तराखंड सिडकुल में मानवता शर्मसार, कंपनी में काम कर रहे थे 16 बच्चे, प्रशासन ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन

21 जून को रात में बाल कल्याण समिति ऊधम सिंह नगर के सदस्य गौरव तागरा को सूचना मिली कि श्री दुर्गा फाइबर्स कंपनी में नाबालिग बच्चे काम कर रहे हैं. तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन सुपरवाइजर गिरीश चंद्र, रोहित शर्मा, समाज सेविका रजनीश बत्रा, उवैस खान और पुलिस टीम के साथ टीम कंपनी पहुंची. निरीक्षण के दौरान 16 नाबालिग बच्चे मिले.

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Edited By: Antima Pal
उत्तराखंड सिडकुल में मानवता शर्मसार, कंपनी में काम कर रहे थे 16 बच्चे, प्रशासन ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन
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रुद्रपुर: सिडकुल पंतनगर की श्री दुर्गा फाइबर्स प्रोडक्ट्स कंपनी में 16 नाबालिग बच्चों से काम कराए जाने का गंभीर मामला सामने आया है. बाल कल्याण समिति, चाइल्ड हेल्पलाइन और पुलिस की संयुक्त टीम ने 21 जून की रात छापेमारी कर इन बच्चों को मुक्त कराया. पुलिस ने कंपनी के खिलाफ बाल श्रम का मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी गई है.

कैसे हुआ भंडाफोड़?

21 जून को रात में बाल कल्याण समिति ऊधम सिंह नगर के सदस्य गौरव तागरा को सूचना मिली कि श्री दुर्गा फाइबर्स कंपनी में नाबालिग बच्चे काम कर रहे हैं. तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन सुपरवाइजर गिरीश चंद्र, रोहित शर्मा, समाज सेविका रजनीश बत्रा, उवैस खान और पुलिस टीम के साथ टीम कंपनी पहुंची. निरीक्षण के दौरान 16 नाबालिग बच्चे मिले.

कंपनी के कर्मचारियों ने बच्चों को छत पर भारी मशीनों के पीछे और थर्माकोल के खाली डिब्बों के बीच छिपा रखा था. बच्चों की उम्र 14 से 17 साल के बीच बताई जा रही है. बच्चों के बयान दर्ज1 जुलाई को बाल कल्याण समिति के सामने पांच बच्चों की काउंसलिंग की गई और उनके बयान दर्ज किए गए. बच्चों के बयानों और उपलब्ध सबूतों से साफ पुष्टि हुई कि कंपनी में नाबालिगों से काम लिया जा रहा था. गौरव तागरा ने इस मामले में थाने में तहरीर दी और कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

 पुलिस की कार्रवाई

पंतनगर थानाध्यक्ष नंदन सिंह रावत ने बताया कि श्री दुर्गा फाइबर्स कंपनी के खिलाफ बाल श्रम निषेध अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है. मामले की विस्तार से जांच की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद कंपनी मालिक और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. 

बाल श्रम की समस्या

उत्तराखंड में सिडकुल जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में बाल श्रम की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं. बच्चे स्कूल जाने की बजाय छोटी-छोटी कमाई के लिए कारखानों में काम करने को मजबूर होते हैं. कई बार मालिक बच्चों को कम वेतन पर ज्यादा काम करवाते हैं और छापेमारी से बचने के लिए उन्हें छिपा देते हैं.