हरिद्वार के प्रेमनगर आश्रम में शुक्रवार से चार दिवसीय हिमालयन MSME एक्सपो की शुरुआत हुई. वाइब्रेंट उत्तराखंड के तत्वावधान में भारती मीडिया एंड इवेंट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से आयोजित इस प्रदर्शनी में पहले दिन स्थानीय लोगों और छात्रों की अच्छी भागीदारी रही. कई राज्यों के कृषि और बागवानी विभागों ने भी अपने उत्पादों और तकनीकों को प्रदर्शित करने के लिए स्टॉल लगाए हैं.
एक्सपो में 100 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जहां उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों के साथ सिक्किम, तेलंगाना, दिल्ली और अन्य राज्यों से आए उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं. आयोजकों के अनुसार, प्रदर्शनी के दौरान MSME विकास, स्टार्टअप और आधुनिक कृषि तकनीकों पर कार्यशालाएं आयोजित होंगी. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी प्रस्तावित है, जिसमें कारोबार और कृषि क्षेत्र से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी.
सिक्किम सरकार के हॉर्टिकल्चर विभाग की अधिकारी आरती ढकाल ने बताया कि ऐसे राष्ट्रीय स्तर के मंच से राज्य के जैविक और बागवानी उत्पादों को देशभर में पहचान दिलाने का अवसर मिलता है. उनके स्टॉल पर जैविक उत्पादों से तैयार शरबत और खास लाल मिर्च से बने उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन किसानों और उद्यमियों को नए बाजार तलाशने में मदद करते हैं.
तेलंगाना सरकार के हॉर्टिकल्चर विभाग के स्टॉल पर जैविक खेती से तैयार फल, सब्जियों और फूलों की जानकारी दी जा रही है. विभाग के अधिकारी रवि नायक के मुताबिक, राज्य के कई किसान जैविक खेती के जरिए बेहतर आमदनी हासिल कर रहे हैं. यहां बैंगन, लौकी, टमाटर, करेला, गोभी, शिमला मिर्च और भिंडी जैसी सब्जियों के साथ गेंदे, गुलाब और रोजमेरी की खेती भी प्रदर्शित की गई है.
एक्सपो में उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों के भी कई स्टॉल लगाए गए हैं. इनमें बिना रसायन तैयार किए गए सूप, गुलकंद और अन्य उत्पाद शामिल हैं. आयोजकों का उद्देश्य स्थानीय और छोटे कारोबारियों को एक मंच देना है, ताकि उनके उत्पादों को बाजार मिल सके और सूक्ष्म उद्योगों के माध्यम से रोजगार के नए अवसर पैदा हों.
सिडकुल निर्माता संघ के सचिव और एक्सपो आयोजक विवेक चौहान ने बताया कि यह आयोजन स्थानीय व्यापारियों, युवाओं और नए उद्यमियों के लिए उपयोगी साबित होगा. एक्सपो में आयुर्वेदिक, हर्बल, फूड प्रोसेसिंग, एरोमा, हस्तशिल्प, कृषि और बागवानी से जुड़े स्टॉल लगाए गए हैं. चार दिनों में सेमिनार और कार्यशालाओं के जरिए युवाओं को MSME, कृषि और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी.