हरिद्वार: मगरमच्छों की बढ़ती चहलकदमी ने हरिद्वार के ग्रामीण इलाकों में चिंता बढ़ा दी है. उत्तराखंड में लगातार बारिश के बाद नदियों का जलस्तर बढ़ा है और तेज बहाव के साथ मगरमच्छ अपने ठिकानों से निकलकर आबादी के नजदीक पहुंच रहे हैं. रुड़की, कलियर और आसपास के इलाकों में मगरमच्छ दिखाई देने की सूचनाओं से लोग सतर्क हैं. गंगनहर और सोलानी नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों को डर है कि पानी के पास काम करते समय किसी अप्रिय घटना का सामना न करना पड़े. बारिश के मौसम में उत्तराखंड की नदियों का जलस्तर बढ़ने से जलीय जीवों के ठिकाने भी बदल जाते हैं. हरिद्वार जिले में इसी वजह से कई इलाकों में मगरमच्छों की मौजूदगी की खबरें सामने आ रही हैं. ग्रामीणों का कहना है कि नदी और नहर का पानी बढ़ने के साथ ये जीव ऐसे स्थानों तक पहुंच रहे हैं, जहां आमतौर पर इन्हें कम देखा जाता है.
रुड़की और कलियर के बीच गंगनहर में मगरमच्छ दिखाई देने की सूचना के बाद लोगों में डर बढ़ गया है. गंगनहर के आसपास बड़ी संख्या में आबादी है और ग्रामीण रोजमर्रा के काम के लिए इसके किनारे पहुंचते हैं. कई ग्रामीण पशुओं को पानी पिलाने, खेतों में जाने और दूसरे कामों के लिए नदी या नहर के आसपास जाते हैं. ऐसे में पानी से निकलकर किनारे आने वाला मगरमच्छ उनके लिए खतरा बन सकता है.
मगरमच्छ दिखाई देने की सूचनाएं कई जगहों से सामने आई हैं. इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के दौरान खेतों और नदी किनारे झाड़ियों में पानी भर जाता है. ऐसे में मगरमच्छों को छिपने के लिए नए स्थान मिल जाते हैं. झाड़ियों और जलभराव वाले हिस्सों में उनकी मौजूदगी का पता लगाना भी आसान नहीं होता.
बारिश के दौरान नदी और नहर का बहाव तेज होने पर मगरमच्छ बहकर दूसरे हिस्सों तक पहुंच सकते हैं. यही कारण है कि नदी किनारे बसे गांवों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है. विशेषज्ञों के मुताबिक पानी के आसपास अचानक दिखाई देने वाले मगरमच्छ से दूरी बनाए रखना सबसे जरूरी है. उसे पकड़ने या भगाने की कोशिश करना खतरनाक हो सकता है.
ग्रामीणों का आरोप है कि मगरमच्छ दिखाई देने की कई सूचनाओं के बावजूद संवेदनशील इलाकों में पर्याप्त निगरानी नहीं हो रही है. लोगों ने नदी और गंगनहर किनारे गश्त बढ़ाने की मांग की है. ग्रामीणों की मांग है कि जिन स्थानों पर मगरमच्छ बार-बार दिखाई दे रहे हैं, उन्हें चिन्हित किया जाए. आबादी के नजदीक पहुंचने वाले मगरमच्छों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर प्राकृतिक क्षेत्र में छोड़ा जाए