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हल्द्वानी के बनभूलपुरा अतिक्रमण विवाद पर टली 'सुप्रीम' सुनवाई, अब 10 दिसंबर को होगा 50,000 लोगों का फैसला

हल्द्वानी के बनभूलपुरा अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई आज टल गई और अब 10 दिसंबर को होगी. इलाके में भारी पुलिस तैनाती रही और 21 उपद्रवी गिरफ्तार हुए. लगभग 50 हजार आबादी से जुड़े इस मामले पर कोर्ट ने पुनर्वास योजना की जानकारी भी मांगी है.

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Kanhaiya Kumar Jha

हल्द्वानी: बनभूलपुरा रेलवे स्टेशन से लगी जमीन पर कथित अतिक्रमण को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है. शनिवार को इस बहुचर्चित मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई निर्धारित थी, लेकिन कोर्ट ने सुनवाई की तारीख आगे बढ़ा दी. इससे पहले ही इलाके में तनाव का माहौल बना रहा और पूरा क्षेत्र सुरक्षा के साये में रहा.

हाईअलर्ट पर रहा बनभूलपुरा, 21 उपद्रवी गिरफ्तार

सुनवाई से पहले हल्द्वानी प्रशासन ने पूरे बनभूलपुरा क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए. पुलिस बल तैनाती इतनी घनी थी मानो हर सड़क सुरक्षा का एक अलग मोर्चा बन गई हो. दिनभर पुलिस और प्रशासनिक टीम क्षेत्र में गश्त करती रही. इसी बीच उपद्रव फैलाने की कोशिश करने वाले 21 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया.

स्थानीय लोग लगातार इस बात को लेकर आशंकित रहे कि कहीं अचानक कोई कार्रवाई न हो जाए. जिन परिवारों के घर अतिक्रमण की जद में आते हैं, वे सुप्रीम कोर्ट की अगली तारीख का इंतजार दुआओं के साथ कर रहे हैं.

अब 10 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई

आज की सुनवाई टलने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट 10 दिसंबर को मामले की सुनवाई करेगा. यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे लगभग 50 हजार से अधिक आबादी का भविष्य जुड़ा हुआ है. रेलवे की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि रेलवे ट्रैक के विकास और सुरक्षा के लिए संबंधित जमीन पर कब्जा हटाना जरूरी है, इसलिए जल्द सुनवाई कर निर्णय लिया जाए.

हाईकोर्ट के आदेश पर रोक, पुनर्वास योजना पर सवाल

गौरतलब है कि नैनीताल हाईकोर्ट ने पहले अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे, जिसके बाद प्रभावित लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा रखी है. पिछली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तराखंड सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा था कि जिन बस्तियों में हजारों लोग रहते हैं, क्या उनके पुनर्वास के लिए कोई ठोस मास्टर प्लान तैयार किया गया है? कोर्ट ने यह भी पूछा था कि यदि घर टूटते हैं, तो इन परिवारों को वैकल्पिक व्यवस्था किस तरह उपलब्ध कराई जाएगी.

स्थानीय लोगों में चिंता, प्रशासन सतर्क

अगली तारीख तय होने के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं कही जा सकती. लोग अभी भी चिंतित हैं कि उनका भविष्य किस दिशा में जाएगा. उधर, प्रशासन का कहना है कि शांति बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पर्याप्त बल तैनात रहेगा.