देहरादून: हल्द्वानी में निजी संस्थानों और स्कूलों की फायर सेफ्टी व्यवस्था की लगातार जांच कर रहा जिला प्रशासन अब खुद अपने विभागों की तैयारियों को लेकर सवालों के घेरे में है. शहर के बीचोंबीच स्थित विद्युत विभाग के मुख्य कार्यालय में सुरक्षा इंतजामों की वास्तविक स्थिति चिंताजनक मिली. भवन में लगे कई अग्निशमन उपकरण समय सीमा पार कर चुके हैं और उनकी देखरेख लंबे समय से नहीं की गई. ऐसे में किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
तीन मंजिला विद्युत विभाग कार्यालय में लगे कई फायर एक्सटिंग्विशर एक्सपायर पाए गए. कई उपकरणों पर धूल जमी हुई थी, जिससे साफ संकेत मिलता है कि लंबे समय से उनकी जांच या रिफिलिंग नहीं हुई. यह स्थिति ऐसे विभाग में सामने आई है जहां विद्युत उपकरणों के कारण आग लगने का खतरा हमेशा बना रहता है.
कार्यालय में प्रतिदिन बड़ी संख्या में कर्मचारी, अधिकारी और उपभोक्ता पहुंचते हैं. इसके अलावा भवन में विभाग के कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और पुराने सरकारी रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखे गए हैं. यदि किसी कारणवश आग लगती है तो जान-माल के साथ सरकारी अभिलेखों को भी भारी नुकसान पहुंच सकता है.
मामले पर अधिशासी अभियंता प्रदीप कुमार ने कहा कि अग्निशमन सिलेंडरों की रिफिलिंग की प्रक्रिया जारी है. उनका कहना है कि यदि इस दौरान कोई आपात स्थिति बनती है तो दूसरे कार्यालय से फायर एक्सटिंग्विशर मंगाए जा सकते हैं. इस बयान के बाद विभागीय तैयारियों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.
विभागीय अधिकारियों के अनुसार पुराने उपकरणों को बदलने के लिए नए फायर एक्सटिंग्विशर का ऑर्डर जारी कर दिया गया है. मंजूरी मिलने के बाद जल्द ही नए उपकरण कार्यालय में स्थापित किए जाएंगे. अधिकारियों का दावा है कि अगले कुछ दिनों में पूरी व्यवस्था को अपडेट कर लिया जाएगा.
अधिकारियों ने बताया कि ट्रांसफॉर्मर और सब-स्टेशनों जैसे संवेदनशील स्थानों पर नए अग्निशमन उपकरण पहले ही लगाए जा चुके हैं. हालांकि कार्यालय भवन में मौजूद एक्सपायर सिलेंडरों ने सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जहां प्रतिदिन सैकड़ों लोग आते हैं, वहां फायर सेफ्टी को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई.