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मां वैष्णो देवी के बाद क्यों खास माना जाता है दूनागिरि धाम? CM धामी ने भी श्रद्धालुओं से की ये खास अपील

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित मां दूनागिरि मंदिर को वैष्णो देवी के बाद प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है. त्रेता और द्वापर युग से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के कारण यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है.

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Edited By: Reepu Kumari
मां वैष्णो देवी के बाद क्यों खास माना जाता है दूनागिरि धाम? CM धामी ने भी श्रद्धालुओं से की ये खास अपील
Courtesy: @pushkardhami

Dunagiri Temple: देवभूमि उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित मां दूनागिरि मंदिर सदियों से श्रद्धा, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है. हिमालय की गोद में बसे इस पवित्र धाम को वैष्णो देवी के बाद महत्वपूर्ण शक्तिपीठों में गिना जाता है. हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर मां के दर्शन करते हैं और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं. दूनागिरि धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि पौराणिक इतिहास और धार्मिक परंपराओं का जीवंत प्रतीक भी है. त्रेता युग से लेकर द्वापर युग तक की कई कथाएं इस स्थान से जुड़ी हुई हैं. यही कारण है कि यह धाम उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विशेष स्थान रखता है और देशभर के श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है.

CM धामी ने श्रद्धालुओं को दिया विशेष संदेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर मां दूनागिरि मंदिर को श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का दिव्य केंद्र बताया. उन्होंने कहा कि मां दुर्गा को समर्पित यह पवित्र धाम प्राकृतिक सौंदर्य और अलौकिक शांति से परिपूर्ण है. मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से अपील की कि अल्मोड़ा आने पर वे मां दूनागिरि के दर्शन अवश्य करें और यहां की सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करें.

त्रेता युग से जुड़ी है मंदिर की मान्यता

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार त्रेता युग में जब मेघनाथ के शक्ति बाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे, तब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने द्रोणांचल पर्वत पहुंचे थे. कहा जाता है कि पर्वत का एक हिस्सा वर्तमान दूनागिरि क्षेत्र में गिरा था. इसी घटना के बाद इस स्थान का धार्मिक महत्व बढ़ा और यहां मां दूनागिरि की पूजा शुरू हुई. श्रद्धालु आज भी इस कथा को गहरी आस्था के साथ याद करते हैं.

द्वापर युग और पांडवों से भी जुड़ा संबंध

द्वापर युग में यह क्षेत्र द्रोणाचार्य की तपोस्थली माना गया. धार्मिक ग्रंथों में इसका उल्लेख द्रोण पर्वत के रूप में मिलता है. मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने युद्ध में विजय और द्रौपदी की रक्षा के लिए यहां मां दुर्गा की आराधना की थी. इसी कारण यह स्थान शक्ति साधना और तप की भूमि के रूप में प्रसिद्ध हुआ.

संतान प्राप्ति और विशेष पूजा के लिए प्रसिद्ध धाम

दूनागिरि मंदिर को लेकर यह मान्यता भी प्रचलित है कि यहां अखंड दीपक जलाकर पूजा करने वाली महिलाओं की संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी होती है. मंदिर के गर्भगृह में दो शिलाओं के रूप में देवी शक्ति की पूजा की जाती है. इतिहासकारों के अनुसार कत्यूरी राजा सुधारदेव ने वर्ष 1318 में यहां देवी की प्रतिमा स्थापित कराई थी. वर्तमान मंदिर का स्वरूप वर्ष 1920 में स्थानीय लोगों के सहयोग से विकसित किया गया.

कैसे पहुंचें मां दूनागिरि धाम

अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट से लगभग 14 किलोमीटर दूर मंगलीखान तक सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है. इसके बाद करीब 400 सीढ़ियों की चढ़ाई पूरी कर श्रद्धालु मां दूनागिरि के दर्शन करते हैं. प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण इस यात्रा को और विशेष बना देते हैं.