UP में सस्ती और उत्तराखंड में महंगी बिजली, क्या है कीमत में अंतर का कारण; जान लीजिए इसकी असली वजह

उत्तराखंड में घरेलू बिजली यूपी से महंगी क्यों है, इसका कारण सामने आ गया है. सबसे बड़ी वजह सब्सिडी की कमी और सरकारी सहायता का अंतर बताया जा रहा है.

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Babli Rautela

उत्तराखंड में घरेलू बिजली की कीमतें लगातार चर्चा में बनी हुई हैं. खास बात यह है कि यहां बिजली दरें पड़ोसी उत्तर प्रदेश से ज्यादा हैं, जबकि कुछ साल पहले स्थिति उलट थी. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसा क्या बदला कि यूपी में बिजली सस्ती होती गई और उत्तराखंड में महंगी. ताजा आंकड़ों के मुताबिक यूपी में घरेलू बिजली की दर करीब 5.81 रुपये प्रति यूनिट है, जबकि उत्तराखंड में यही दर 6.16 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच चुकी है.

इंडस्ट्री के लिए यूपी में बिजली 7.96 रुपये प्रति यूनिट मिलती है, जबकि उत्तराखंड में यह 8.24 रुपये है. वहीं किसानों के ट्यूबवेल के लिए यूपी में 2.35 रुपये और उत्तराखंड में 2.86 रुपये प्रति यूनिट देना पड़ता है. हालांकि बिजली सप्लाई की लागत यूपी में 9.89 रुपये प्रति यूनिट है, जो उत्तराखंड के 8.87 रुपये से ज्यादा है. इसके बावजूद उपभोक्ताओं को यूपी में सस्ती बिजली मिल रही है.

असली वजह सब्सिडी का बड़ा अंतर

इस पूरे अंतर की सबसे बड़ी वजह सब्सिडी को माना जा रहा है. उत्तराखंड में सरकार की ओर से बिजली पर बहुत सीमित सब्सिडी दी जाती है. यहां केवल करीब 100 करोड़ रुपये की सहायता 100 यूनिट तक के उपभोक्ताओं को मिलती है.

वहीं उत्तर प्रदेश में सरकार करीब 19094 करोड़ रुपये की भारी सब्सिडी देती है. इसी वजह से वहां घरेलू उपभोक्ताओं, किसानों और गरीब वर्ग को सस्ती बिजली मिल पाती है.

दूसरे राज्यों में भी मिलती है बड़ी राहत

सिर्फ यूपी ही नहीं, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों में भी भारी सब्सिडी दी जाती है. जैसे हिमाचल में 943 करोड़, पंजाब में 16892 करोड़, कर्नाटक में 30434 करोड़, राजस्थान में 29846 करोड़ और मध्य प्रदेश में 26796 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जाती है. कुल मिलाकर देश के 26 राज्य बिजली पर करीब 238332 करोड़ रुपये की सब्सिडी दे रहे हैं. इससे वहां के उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिलता है.

विशेषज्ञों के अनुसार उत्तराखंड में ऊर्जा निगम को सरकार की ओर से पर्याप्त वित्तीय सहायता नहीं मिलती. इसी वजह से कंपनियों को अपनी लागत सीधे उपभोक्ताओं से वसूल करनी पड़ती है. इससे घरेलू, औद्योगिक और किसान वर्ग पर बिजली का बोझ बढ़ जाता है. इंडस्ट्री एसोसिएशन के उपाध्यक्ष पवन अग्रवाल का कहना है कि राज्य में सस्ती बिजली के लिए जरूरी सहयोग नहीं दिया जा रहा है.