उत्तराखंड के युवाओं के लिए खुशखबरी, साल में दो बार हो सकती है डीएलएड प्रवेश परीक्षा

उत्तराखंड में डीएलएड की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है. सरकार साल में 2 बार डीएलएड प्रवेश परीक्षा कराने पर विचार कर रही है. इससे अधिक संख्या में अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण का अवसर मिल सकेगा और भविष्य में शिक्षकों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी.

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Babli Rautela

उत्तराखंड में शिक्षक बनने का सपना देख रहे हजारों युवाओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. राज्य सरकार डीएलएड प्रवेश परीक्षा को साल में दो बार आयोजित करने की संभावना पर गंभीरता से विचार कर रही है. यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो प्रदेश के अधिक युवाओं को शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा और भविष्य में शिक्षकों की कमी को दूर करने में भी मदद मिलेगी.

साल में 2 बार परीक्षा कराने पर चल रहा विचार

शिक्षा विभाग डीएलएड प्रवेश परीक्षा वर्ष में दो बार आयोजित करने के प्रस्ताव पर काम कर रहा है. हालांकि अंतिम निर्णय लेने से पहले विभाग अन्य राज्यों में लागू परीक्षा व्यवस्था का अध्ययन करेगा. इसके बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा. शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत पहले ही संकेत दे चुके हैं कि सरकार इस दिशा में सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ रही है. हाल ही में हुई विभागीय बैठक में भी इस विषय पर चर्चा की गई थी.

डीएलएड सीटों की संख्या है सीमित

वर्तमान समय में उत्तराखंड के 13 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों यानी डायट में 50-50 सीटें निर्धारित हैं. इस तरह पूरे राज्य में कुल 650 सीटों पर ही हर साल प्रवेश दिया जाता है. इन सीमित सीटों के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रशिक्षण से वंचित रह जाते हैं. दूसरी ओर प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है, जिससे सरकार नए विकल्पों पर विचार कर रही है. डीएलएड को लेकर युवाओं में कितनी रुचि है, इसका अंदाजा पिछले सत्र के आंकड़ों से लगाया जा सकता है. पिछले वर्ष 650 सीटों के लिए 65 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था. यह आंकड़ा बताता है कि सीटों की तुलना में उम्मीदवारों की संख्या कई गुना अधिक है. ऐसे में परीक्षा वर्ष में दो बार आयोजित करने से अधिक युवाओं को अवसर मिलने की संभावना है.


हर साल बढ़ रही प्रशिक्षित शिक्षकों की जरूरत

देशभर में प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए डीएलएड प्रशिक्षण अनिवार्य है. वहीं उत्तराखंड में हर साल एक हजार से अधिक प्राथमिक शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं. इससे स्कूलों में रिक्त पदों की संख्या लगातार बढ़ रही है. शिक्षा विभाग का मानना है कि यदि प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ाई जाती है तो भविष्य में शिक्षक भर्ती के लिए पर्याप्त योग्य उम्मीदवार उपलब्ध रहेंगे. इसी वजह से विभाग प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की संख्या दोगुनी करने की योजना पर भी विचार कर रहा है.