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MBA छात्र ने कॉलेज फीस के लिए बेची किडनी, 9 लाख में हुआ सौदा लेकिन मिले सिर्फ 3.5 लाख; डॉक्टर समेत कई गिरफ्तार

एमबीए छात्र ने फीस भरने के लिए किडनी बेची लेकिन 9 लाख के सौदे में सिर्फ 3.5 लाख मिले. पुलिस ने किडनी रैकेट का खुलासा कर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
MBA छात्र ने कॉलेज फीस के लिए बेची किडनी, 9 लाख में हुआ सौदा लेकिन मिले सिर्फ 3.5 लाख; डॉक्टर समेत कई गिरफ्तार
Courtesy: Pinterest

देहरादून: देहरादून के एक जाने-माने कॉलेज में MBA के चौथे सेमेस्टर के छात्र ने अपनी ट्यूशन फीस चुकाने के लिए अपनी किडनी बेचने की सहमति दी. हालांकि किडनी निकलवाने के लिए उसने सर्जरी भी करवाई लेकिन वह धोखाधड़ी का शिकार हो गया. उसने पुलिस को बताया कि शुरुआत में सौदा ₹9 लाख में तय हुआ था लेकिन इसमें शामिल लोगों ने बाद में सिर्फ ₹6 लाख देने की बात कही. 

सर्जरी पूरी होने के बाद उसके बैंक खाते में सिर्फ ₹3.50 लाख ही जमा किए गए. उसने पुलिस से गुहार लगाई है कि उसे बकाया रकम वापस दिलवाने में मदद की जाए.

कानपुर के DCP ने क्या बताया?

कानपुर के DCP एस.एम. कासिम आबिदी ने बताया कि छात्र आयुष कुमार बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला है और फिलहाल देहरादून में MBA की पढ़ाई कर रहा है. उसने पुलिस को बताया कि उसके परिवार में उसकी मां, एक छोटा भाई और एक बहन हैं. उसके पिता ने किसी अज्ञात कारण से आत्महत्या कर ली थी. जिसके वजह से इस डर से कि उसे अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ेगी, उसने अपनी किडनी बेचने की सहमति दे दी.

किडनी रैकेट के संपर्क में कैसे आया?

जब पुलिस ने उससे पूछा कि वह किडनी रैकेट के संपर्क में कैसे आया, तो उसने बताया कि करीब पांच-छह महीने पहले वह Telegram पर बने एक किडनी डोनर ग्रुप में शामिल हुआ था. शुरुआत में उसका इरादा लोन लेकर अपनी फीस चुकाने का था लेकिन उसे लोन नहीं मिल पाया. इसके बाद उसने अपनी किडनी दान करने का फैसला किया. उसे डॉ. अफजल और डॉ. वैभव नाम के दो लोग कानपुर लेकर आए. 

DCP ने क्या बताया?

DCP ने आगे बताया कि आयुष साइबर अपराध से जुड़ी गतिविधियों में भी शामिल रहा है; पुलिस ने इस बात को साबित करने के लिए सबूत भी जुटाए हैं. बताया जा रहा है कि उसने कई म्यूल अकाउंट यानी पैसे की हेराफेरी के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते भी खोल रखे हैं. नतीजतन आपराधिक तत्वों के साथ उसकी संभावित मिलीभगत से जुड़ी जानकारियों की फिलहाल गहन जांच की जा रही है. 

जांच के दौरान क्या आया सामने?

ACP आशुतोष कुमार ने बताया कि जांच के दौरान लखनऊ और नोएडा के कुछ अस्पतालों के बारे में जानकारी सामने आई है. ऐसा लगता है कि जब किसी मरीज की हालत शुरुआती अस्पताल में बिगड़ जाती थी, तो उसे बाद में लखनऊ और नोएडा के बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता था. यह साफ है कि इन अस्पतालों की भी इस अवैध किडनी व्यापार में भूमिका है. जांच अभी जारी है. 

किडनी के अवैध व्यापार और गैर-कानूनी ट्रांसप्लांट से जुड़े एक रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है. पुलिस ने पांच डॉक्टरों जिनमें IMA की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा भी शामिल हैं और एक बिचौलिए को गिरफ्तार किया है. पुलिस फिलहाल चार अन्य लोगों की तलाश कर रही है, जिनमें दो और डॉक्टर शामिल हैं.