उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को लेकर भले ही राज्य हिमाचल प्रदेश और पंजाब से पीछे हो, लेकिन स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के मामले में प्रदेश की स्थिति बेहतर है. सरकारी विद्यालयों में भवन और फर्नीचर जैसी जरूरी सुविधाओं को लेकर सामने आई ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 15,873 सरकारी स्कूलों में से केवल 85 विद्यालय ऐसे हैं, जिनके पास अभी अपना भवन नहीं है.
समग्र शिक्षा के तहत यू-डायस की ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है. रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में अधिकांश सरकारी स्कूलों के पास अपना भवन उपलब्ध है. वहीं, 351 स्कूल ऐसे हैं जहां अभी फर्नीचर की सुविधा उपलब्ध नहीं है. सरकार ने इस साल सभी सरकारी विद्यालयों को भवन और फर्नीचर की सुविधा से शत-प्रतिशत आच्छादित करने का लक्ष्य रखा है.
उत्तराखंड के चार पर्वतीय जिलों में सरकारी स्कूल भवनों के मामले में स्थिति पूरी तरह बेहतर है. अल्मोड़ा, चमोली, चंपावत और रुद्रप्रयाग में सभी सरकारी स्कूलों के पास अपने भवन हैं. इन पर्वतीय जिलों में छह हजार से अधिक सरकारी विद्यालय हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश, बर्फबारी और कड़ाके की ठंड जैसी परिस्थितियों को देखते हुए स्कूलों के पास सुरक्षित और स्थायी भवन होना विद्यार्थियों के लिए बेहद जरूरी माना जाता है.
हालांकि कुछ जिलों में अभी भी भवनविहीन स्कूल मौजूद हैं. वर्तमान में नैनीताल में 40, टिहरी में 12 और ऊधम सिंह नगर में 11 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास अपना भवन नहीं है. अधिकारियों के अनुसार, इनमें से अधिकांश विद्यालयों के भवन निर्माण का काम चल रहा है.
स्कूलों में फर्नीचर की उपलब्धता की बात करें तो राज्य के 351 सरकारी विद्यालय अभी इस सुविधा से पूरी तरह आच्छादित नहीं हैं. इनमें सबसे ज्यादा 77 स्कूल रुद्रप्रयाग में हैं, जहां फर्नीचर की सुविधा उपलब्ध नहीं है. इसके अलावा पिथौरागढ़ के 41 और नैनीताल के 39 सरकारी स्कूलों में भी फर्नीचर की कमी बताई गई है. दूसरी तरफ चमोली और चंपावत के सभी सरकारी स्कूलों में फर्नीचर उपलब्ध है. स्कूलों में फर्नीचर की कमी का एक कारण हर साल फर्नीचर का खराब होना भी है. स्कूल प्रशासन की ओर से क्षतिग्रस्त फर्नीचर की मरम्मत कराकर उसे दोबारा कक्षाओं में इस्तेमाल करने की कोशिश की जाती है.
उत्तराखंड सरकार का कहना है कि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए केवल पढ़ाई की गुणवत्ता पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है. इसके साथ स्कूलों में सुरक्षित भवन, फर्नीचर और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराना जरूरी है. शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के अनुसार, सरकार का लक्ष्य इसी वर्ष राज्य के सभी सरकारी स्कूलों को भवन और फर्नीचर की सुविधा से शत-प्रतिशत आच्छादित करना है. इसके लिए आवश्यक स्तर पर काम किया जा रहा है और विभाग को इस संबंध में पहले भी निर्देश दिए जा चुके हैं.
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में सरकारी स्कूलों के लिए स्थायी भवन उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती माना जाता है. दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम की चुनौतियों के बावजूद बड़ी संख्या में विद्यालयों को अपने भवन उपलब्ध कराए गए हैं. ताजा आंकड़े बताते हैं कि राज्य के अधिकांश सरकारी विद्यालयों में भवन की सुविधा मौजूद है और जिन स्कूलों के पास अभी भवन नहीं हैं, उनमें से कई निर्माणाधीन हैं. सरकार की ओर से शत-प्रतिशत कवरेज का लक्ष्य पूरा होने के बाद राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए बेहतर और सुरक्षित शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा.