दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर, विकास और पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संगम
उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सराहना करते हुए कहा कि PM नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड में आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार हो रहा है.
उत्तराखंड में आधुनिक आधारभूत ढांचे के विकास को नई रफ्तार मिल रही है. खास बात यह है कि विकास परियोजनाओं को पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है. इसी दिशा में दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे परियोजना एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरी है, जहां तेज और सुरक्षित यातायात के साथ-साथ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन को भी प्राथमिकता दी गई है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड में आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार हो रहा है. उन्होंने विशेष रूप से गणेशपुर देहरादून खंड पर निर्मित 12 किलोमीटर लंबे वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर का उल्लेख किया, जिसे एशिया का सबसे लंबा वन्यजीव कॉरिडोर माना जा रहा है.
विकास और पर्यावरण का संतुलन
यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे पर्यावरणीय जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क निर्माण के बावजूद वन्यजीवों के प्राकृतिक मार्ग प्रभावित न हों और उनकी आवाजाही सुरक्षित बनी रहे.
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यात्रा होगी ज्यादा आसान और सुरक्षित
दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे के पूरा होने से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है. आधुनिक तकनीक से विकसित यह मार्ग यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक सफर का अनुभव प्रदान करेगा. साथ ही सड़क पर यातायात का दबाव भी कम होगा.
वन्यजीव संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह वन क्षेत्रों से गुजरने वाले जानवरों के लिए सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराता है. इससे सड़क दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की मौत की घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी और जैव विविधता के संरक्षण को भी बल मिलेगा.
उत्तराखंड के विकास में अहम कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना राज्य के आर्थिक विकास, पर्यटन और कनेक्टिविटी को नई दिशा देगी. साथ ही यह दिखाती है कि बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को पर्यावरण संरक्षण के साथ भी सफलतापूर्वक लागू किया जा सकता है. दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे भविष्य में देश की अन्य परियोजनाओं के लिए भी एक मॉडल के रूप में देखा जा सकता है.