जंतर-मंतर पर आरक्षण को लेकर चल रहे विरोध के बीच योगगुरु रामदेव ने सामाजिक सम्मान और संवैधानिक अधिकारों को लेकर बड़ा बयान दिया है. रविवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर SC/ST समुदाय के किसी व्यक्ति का अपमान संविधान के खिलाफ माना जाता है, तो ब्राह्मणों के अपमान को भी इसी नजरिए से देखा जाना चाहिए. रामदेव ने कहा कि देश में छात्रों, मरीजों, सैनिकों और किसानों समेत अलग-अलग सामाजिक वर्गों के साथ अन्याय की शिकायतें सामने आती रहती हैं. उनके मुताबिक किसी भी समुदाय के सम्मान और अधिकारों के मामले में समान दृष्टिकोण होना चाहिए.
रामदेव ने आंदोलनों के तरीके पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि सड़क और संसद में हंगामे या व्यवधान के जरिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को बाधित नहीं किया जाना चाहिए. उनका कहना था कि यदि किसी नागरिक के साथ अन्याय हो रहा है तो 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोग लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा सकते हैं. उन्होंने नाबालिग बच्चों को आंदोलनों में आगे करने से भी बचने की बात कही.
बाबा रामदेव के सुर बदले
— Sachin Gupta (@Sachingupta) August 23, 2026
"आजकल लोगों ने हमें खूब पेल रखा है तो हम ज्यादा बात नहीं करेंगे"
"कुछ लोग इस फिराक में हैं कि सड़क से संसद तक हंगामा करके इस देश की सत्ता हथिया लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता"
"बच्चों को आंदोलन में नहीं उतारना चाहिए। लड़ना है तो खुद लड़ो" https://t.co/bhufCYibEl pic.twitter.com/eBsQRV6doW
योगगुरु ने ‘एक देश, एक चुनाव’ का समर्थन करते हुए इसे शिक्षा और विकास के लिए उपयोगी बताया. उन्होंने कहा कि देश में लगातार चुनाव होने से व्यवस्था पर दबाव पड़ता है और विकास से जुड़े काम प्रभावित हो सकते हैं. उनके अनुसार चुनावी व्यवधान कम होने से शिक्षा व्यवस्था समेत दूसरे क्षेत्रों पर भी बेहतर ध्यान दिया जा सकता है.
वंदे मातरम को लेकर रामदेव ने भारत माता को आस्था, शक्ति और ज्ञान के केंद्र के रूप में वर्णित किया. उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और संस्कृत के अर्थ को समझने के लिए लोगों को इसके मूल भाव का अध्ययन करना चाहिए. रामदेव के मुताबिक भारत माता उनके लिए आस्था, कर्तव्य, उद्देश्य और धर्म से जुड़ा सर्वोच्च भाव है.