हरदोई: उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार पर शून्य सहनशीलता की नीति के तहत योगी सरकार ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है. हरदोई जिले में दो नगर पालिकाओं के अधिशासी अधिकारियों (ईओ) को रिश्वतखोरी के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. इस डबल एक्शन से पूरे जिले में चर्चा का माहौल है.
शाहाबाद नगर पालिका के ईओ केके सोनकर को एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथों पकड़ा. आरोप है कि उन्होंने एक ठेकेदार के 27 लाख रुपये के लंबित बिल पास करने के बदले दो लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी. शिकायत मिलते ही एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाया और जब अधिकारी रिश्वत ले रहे थे, तभी उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.
सूत्र बताते हैं कि पकड़े जाने के दौरान अधिकारी बचने की कोशिश करते नजर आए, लेकिन टीम ने उन्हें छोड़ा नहीं. केके सोनकर पर पहले भी एक महिला के साथ अनैतिक संबंधों के गंभीर आरोप लग चुके थे, जिसकी वजह से वह पहले भी सुर्खियों में रहे थे.
दूसरी कार्रवाई बिलग्राम नगर पालिका के ईओ नीलाब शाल्या के खिलाफ हुई. उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था. वीडियो में एक व्यक्ति बाइक की डिग्गी में डेढ़ लाख रुपये रखते दिख रहा है, जबकि ईओ मौके पर मौजूद थे. वीडियो में कथित तौर पर भूसा खरीद से जुड़े घूसकांड की बातचीत भी सुनाई दे रही थी. मामला सामने आने के बाद डीएम अनुनय झा ने तुरंत जांच के आदेश दिए.
जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होने के बाद स्थानीय निकाय विभाग ने नीलाब शाल्या को भी सस्पेंड कर दिया. कान्हा गोशाला में मवेशियों के लिए भूसा खरीद के मामले में यह कथित अनियमितता सामने आई थी.
हरदोई में एक साथ दो ईओ के खिलाफ कार्रवाई से नगर निकायों के अधिकारियों में खलबली मच गई है. कर्मचारी और ठेकेदार इस पूरे मामले पर चर्चा कर रहे हैं. योगी सरकार के इस एक्शन को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है. सरकारी सूत्रों का कहना है कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा. शिकायत मिलने पर तुरंत जांच और कार्रवाई की जा रही है.