लखनऊ: उत्तर प्रदेश के राज्यानुदानित अरबी-फारसी मदरसों के शिक्षकों के वेतन और वेतनमान को लेकर शासन स्तर पर हलचल तेज हो गई है. अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय ने अब उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार से वेतन व्यवस्था के मूल आधार का पूरा हिसाब मांग लिया है.
खास बात यह है कि निदेशालय ने सिर्फ वर्तमान वेतन की जानकारी नहीं मांगी, बल्कि यह सवाल खड़ा किया है कि आखिर मदरसा शिक्षकों को शिक्षा विभाग के शिक्षकों के समान वेतन देने का आधार क्या था.
निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण की ओर से रजिस्ट्रार को भेजे गए पत्र में शासन के 1 सितंबर 2026 के निर्देशों का हवाला देते हुए चार बेहद अहम बिंदुओं पर स्पष्ट आख्या मांगी गई है. सबसे पहला सवाल सीधे 19 अप्रैल 2010 के शासनादेश पर है. निदेशालय ने पूछा है कि वेतन समिति-2008 के क्रम में वित्त विभाग की सहमति से अरबी-फारसी मदरसों के शैक्षिक पदों का वेतन शिक्षा विभाग के शिक्षकों की भांति निर्धारित करने संबंधी शासनादेश जारी करने का आधार क्या था ?
निदेशालय ने मदरसा शिक्षकों की बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा के शिक्षकों से समकक्षता के आधार को भी स्पष्ट करने को कहा है. यह बिंदु इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि दो अलग-अलग शिक्षा व्यवस्थाओं के शिक्षकों को वेतन के मामले में समकक्ष माना गया, तो उसके पीछे का नियम, आदेश, स्वीकृति और वैधानिक आधार अब सामने रखना होगा.
निदेशालय ने तीसरे बिंदु में वेतन समिति-2016 की संस्तुतियों के अंतर्गत वित्त विभाग के 20 दिसंबर 2016 के शासनादेश के क्रम में चयन वेतनमान एवं प्रोन्नति वेतनमान का लाभ वर्तमान में मान्य विद्यालयों/महाविद्यालयों के पात्र शिक्षकों को मिल रहा है अथवा नहीं, इसकी सूचना मांगी है
सबसे चौंकाने वाले बिंदुओं में एक ₹503.74 लाख यानी करीब ₹5.04 करोड़ के अनुमानित एरियर का मामला है. निदेशालय ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि उपलब्ध कराए गए इस अनुमानित एरियर के आकलन का आधार क्या है?
पत्र में यह भी सामने आया है कि इस मामले में पहले भी निदेशालय की ओर से 14 जुलाई 2026 को सूचना मांगी गई थी. शासन के 10 मार्च 2026 के निर्देशों के अनुपालन में भी बिंदुवार स्पष्ट आख्या उपलब्ध कराने को कहा गया था. लेकिन निदेशालय के मुताबिक 5 महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी वांछित सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई. अब साफ चेतावनी दी गई है कि विलंब होने की स्थिति में संपूर्ण उत्तरदायित्व संबंधित अधिकारी का होगा.
इस पत्र ने 558 राज्यानुदानित मदरसों की वेतन व्यवस्था को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक सवाल खड़ा कर दिया है. क्या मदरसा शिक्षकों को शिक्षा विभाग के शिक्षकों के समान वेतन और वेतनमान देने की पूरी प्रक्रिया ठोस नियमों एवं सक्षम स्वीकृतियों पर आधारित थी ? अब गेंद मदरसा शिक्षा परिषद के पाले में है. परिषद को 2010 के शासनादेश से लेकर 2016 के वेतनमान और करीब ₹5.04 करोड़ के एरियर तक का दस्तावेजी आधार स्पष्ट करना होगा.