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यूपी में बीजेपी के लिए सिर दर्द बन गई हैं ये 115 सीटें, 2027 जीतने के लिए अब तक खर्च कर डाले 38,000 करोड़

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने 115 महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर 38,000 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं के जरिए 2024 लोकसभा चुनाव के नुकसान की भरपाई शुरू कर दी है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
यूपी में बीजेपी के लिए सिर दर्द बन गई हैं ये 115 सीटें, 2027 जीतने के लिए अब तक खर्च कर डाले 38,000 करोड़
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उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के 44 से अधिक जिलों में फैली 115 महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर अपना ध्यान केंद्रित किया है. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मई माह से अब तक मुख्यमंत्री ने इन 115 क्षेत्रों में सड़क, स्कूल, अस्पताल, बिजली, पेयजल, पंचायत भवन, पर्यटन और कौशल विकास जैसे विभिन्न क्षेत्रों की 38,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया है. इस दौरान बड़ी संख्या में लाभार्थियों को जनकल्याणकारी योजनाओं की सहायता राशि और सामग्री भी वितरित की गई है.

115 सीटों का चुनावी समीकरण और 2024 का बदलाव

राजनीतिक दृष्टिकोण से इन 115 विधानसभा सीटों का गणित बेहद महत्वपूर्ण है. 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन ने इन 115 विधानसभा क्षेत्रों में से 67 पर बढ़त हासिल की थी, जो कि कुल सीटों का लगभग 58 प्रतिशत है. इसमें सपा 54 और कांग्रेस 13 विधानसभा क्षेत्रों में आगे रही थी, जबकि बीजेपी केवल 47 और उसकी सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) 1 सीट पर आगे थी. यह स्थिति 2022 के विधानसभा चुनावों के नतीजों से बिल्कुल उलट है, जहां बीजेपी गठबंधन का इन क्षेत्रों पर स्पष्ट वर्चस्व था.

2022 बनाम 2024: आंकड़ों का बड़ा फेरबदल

2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अकेले इन 115 में से 71 सीटों पर जीत दर्ज की थी. वहीं उसकी सहयोगी पार्टी अपना दल (सोनेलाल) को 3 और निषाद पार्टी को 2 सीटें मिली थीं, जिससे बीजेपी गठबंधन का कुल आंकड़ा 76 सीटों पर पहुंच गया था. इसके विपरीत, सपा को 33, आरएलडी को 3, सुभासपा को 2 और कांग्रेस को महज 1 सीट मिली थी. यद्यपि लोकसभा चुनाव की विधानसभा-वार बढ़त सीधे तौर पर विधानसभा परिणाम नहीं होती, फिर भी ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि 2022 से 2024 के बीच किन इलाकों में चुनावी हवा का रुख बदला है.

सपा के गढ़ों में बीजेपी की सेंधमारी की कोशिश

योगी सरकार का यह 38,000 करोड़ रुपये का विकास मॉडल विशेष रूप से उन इलाकों पर केंद्रित है, जिन्हें समाजवादी पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है. इनमें मैनपुरी, इटावा, आजमगढ़, फिरोजाबाद, रामपुर, गाजीपुर, फतेहपुर, अंबेडकर नगर, श्रावस्ती, कैराना और जालौन जैसे लोकसभा क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटें शामिल हैं. उदाहरण के तौर पर, 26 जुलाई को सीएम योगी ने मैनपुरी और करहल विधानसभा क्षेत्रों के लिए 682 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात दी. करहल सीट से 2022 में अखिलेश यादव विधायक चुने गए थे और यह सपा का पारंपरिक राजनीतिक किला रहा है.

कांग्रेस के प्रभाव वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान

2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने इन 115 विधानसभा सीटों से जुड़े तीन प्रमुख लोकसभा क्षेत्रों- रायबरेली, सहारनपुर और बाराबंकी में जीत दर्ज की थी. विपक्ष के नेता राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में बीजेपी की नई रणनीति साफ दिखाई देती है. 24 अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रायबरेली का दौरा कर बछरावां, हरचंदपुर और रायबरेली सदर विधानसभा क्षेत्रों के लिए 879 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया. 2024 के चुनाव में कांग्रेस इन तीनों क्षेत्रों में आगे थी, जबकि 2022 में बीजेपी ने रायबरेली सदर और सपा ने बछरावां व हरचंदपुर सीटें जीती थीं.

विपक्ष की ओर झुकी बीजेपी सीटों की वापसी का प्रयास

115 सीटों की सूची में वे क्षेत्र भी शामिल हैं जहां बीजेपी ने 2022 में विधानसभा चुनाव जीता था, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में जनता का झुकाव विपक्षी उम्मीदवारों की ओर देखा गया. मुख्यमंत्री का गृह जनपद गोरखपुर इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है. 2022 में बीजेपी ने गोरखपुर शहर, पिपराइच, चिल्लूपार और खजनी सीटें जीती थीं, लेकिन 2024 में चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने बढ़त बनाई. इसके बाद से ही सरकार ने गोरखपुर जिले में विकास कार्यों की रफ्तार तेज कर दी है. मई से अब तक गोरखपुर जिले में बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास के लिए 4,387 करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं.

अयोध्या और फैजाबाद का राजनीतिक परिदृश्य

अयोध्या (फैजाबाद) लोकसभा सीट पर 2024 में बीजेपी को मिली हार के बाद सरकार ने इस क्षेत्र में अपने विकास एजेंडे को और तेज कर दिया है. 2024 में सपा उम्मीदवार अवधेश प्रसाद ने बीकापुर, रुदौली और दरियाबाद विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक बढ़त हासिल की थी. इसके जवाब में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रुदौली और बीकापुर क्षेत्रों के लिए 810 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के साथ-साथ अयोध्या नगर निगम क्षेत्र के लिए भी कई बड़े प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की है. बीकापुर में 2022 में बीजेपी की जीत हुई थी, लेकिन 2024 में यह सपा के पाले में चली गई थी.

43 लोकसभा क्षेत्रों में फैला विकास का नेटवर्क

यह 115 विधानसभा क्षेत्र राज्य के कुल 43 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में फैले हुए हैं. 2024 के आम चुनाव में इन 43 लोकसभा सीटों में से सपा ने 21 और कांग्रेस ने 3 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी को 17 और आरएलडी को 2 सीटें मिली थीं. बीजेपी ने आगरा, गोरखपुर, अमरोहा, बुलंदशहर, गाजियाबाद, कुशीनगर, पीलीभीत, हाथरस, गौतम बुद्ध नगर, देवरिया, अलीगढ़, झांसी और महराजगंज जैसी सीटों पर अपनी बढ़त बनाए रखी थी. इस प्रकार, सरकार का विकास अभियान केवल विपक्षी सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन क्षेत्रों में भी जारी है जहां बीजेपी ने अपनी बढ़त बनाए रखी थी.

38,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का व्यापक दायरा

यह विशाल धनराशि किसी एक योजना के बजाय विभिन्न जनोपयोगी क्षेत्रों में वितरित की गई है. इसके अंतर्गत सड़कों का चौड़ीकरण, नए स्कूलों और अस्पतालों का निर्माण, बिजली और जलापूर्ति में सुधार, नई पंचायत परिसदों का गठन, पर्यटन स्थलों का विकास और युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम शामिल हैं.

 प्रमुख क्षेत्रों में पूंजी निवेश का ब्योरा:

 गोरखपुर जिला: 4,387 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास योजनाएं.
 रायबरेली (3 विधानसभा क्षेत्र): 879 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट.
 रुदौली और बीकापुर (अयोध्या): 810 करोड़ रुपये का विकास कार्य.
 मैनपुरी और करहल: 682 करोड़ रुपये की परियोजनाएं.
 पीलीभीत (बरखेड़ा और बीसलपुर): 569 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाएं.

2027 के लिए बीजेपी की नई रणनीति

लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदाताओं का व्यवहार, मुद्दे, प्रत्याशी और समीकरण भिन्न होते हैं. 2024 में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने इन 115 में से 67 सीटों पर बढ़त बनाकर बीजेपी को बड़ा झटका दिया था, जिससे बीजेपी की राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या 2019 के 62 से घटकर 2024 में 33 रह गई. इस राजनीतिक बदलाव को देखते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार ने अपनी विकास नीतियों और सरकारी कार्यक्रमों का केंद्र इन 115 सीटों को बनाया है. 38,000 करोड़ रुपये का यह ढांचागत निवेश बीजेपी के 2027 के चुनावी अभियान की मजबूत नींव तैयार करने का प्रयास है.