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सड़कों पर भीख मांगने वालों को पंजाब सरकार देगी नया जीवन, 590 की पहचान; 32 का हुआ पुनर्वास

पंजाब में ‘स्माइल योजना’ के तहत भिक्षावृत्ति करने वाले 590 लोगों की पहचान हुई है. अमृतसर में 32 लोगों का पुनर्वास हो चुका है. वहीं अब लुधियाना और जालंधर में सर्वे शुरू होगा.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
सड़कों पर भीख मांगने वालों को पंजाब सरकार देगी नया जीवन, 590 की पहचान; 32 का हुआ पुनर्वास
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Punjab Smile Scheme : पंजाब सरकार अब सड़कों पर भिक्षावृत्ति करने वालों को केवल हटाने के बजाय उन्हें परिवार, रोजगार और सरकारी सुविधाओं से जोड़ने पर जोर दे रही है. अमृतसर और पटियाला में 590 लोगों की पहचान की गई है. इनमें अमृतसर के 32 लोगों को अलग-अलग तरीकों से दोबारा समाज की मुख्यधारा से जोड़ा गया है.

अमृतसर में 422 लोगों की पहचान

‘स्माइल योजना’ के तहत अमृतसर में मार्च 2026 से सर्वे चल रहा है. अब तक यहां 422 लोगों की पहचान हुई है. वहीं पटियाला में 168 लोग चिन्हित किए गए हैं. अमृतसर में 32 लोगों का पुनर्वास पूरा हो चुका है. इनमें आठ लोगों को उनके परिवार से मिलाया गया. दो बुजुर्गों को पेंशन दिलाई गई और चार लोगों के आधार कार्ड बनवाए गए. एक व्यक्ति को आशीर्वाद योजना का लाभ मिला. चार लोगों को वृद्धाश्रम भेजा गया और 13 लोगों को रोजगार या अपना काम शुरू करने से जोड़ा गया. 54 लोगों की काउंसलिंग भी हुई है.

जरूरत के अनुसार मिलेगी सरकारी मदद

सामाजिक सुरक्षा मंत्री डॉ. बलजीत कौर के मुताबिक सरकार का मकसद सिर्फ भिक्षावृत्ति रोकना नहीं, बल्कि लोगों की जरूरत समझकर उन्हें सम्मान के साथ आत्मनिर्भर बनाना है. सर्वे के दौरान परिवार, आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य जैसी जरूरतों की जानकारी ली जाती है. इसके बाद पात्र लोगों को पेंशन, स्वास्थ्य सुविधा, दस्तावेज, आवासीय देखभाल, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ा जाता है. परिवार मिलने पर उन्हें वापस घर पहुंचाने की कोशिश होती है. वहीं बेसहारा बुजुर्गों को जरूरत के अनुसार वृद्धाश्रम या दूसरी सहायता दी जाती है.

लुधियाना-जालंधर में शुरू होगा सर्वे

पटियाला में चिन्हित 168 लोगों के पुनर्वास की प्रक्रिया चल रही है. अब सितंबर के दूसरे सप्ताह में लुधियाना और जालंधर में टीमें सर्वे शुरू करेंगी. इस काम में नगर निगम, स्थानीय निकाय, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और कौशल विकास संस्थानों की मदद ली जाएगी. डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि योजना का लक्ष्य लोगों को समाज से अलग करना नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार के जरिए मुख्यधारा से जोड़ना है. उन्होंने लोगों से अपील की कि सड़क पर नकद देने के बजाय जरूरतमंदों को सरकारी सहायता से जोड़ने में मदद करें.