वाराणसी: वाराणसी के गंगा घाटों की रोजाना सफाई होने के बावजूद मानसून और बाढ़ के बाद विशेष सफाई अभियान चलाया जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह गंगा का बढ़ा हुआ जलस्तर है. बारिश के दौरान जब नदी का पानी घाटों की सीढ़ियों तक पहुंचता है और बाद में वापस उतरता है, तो अपने साथ लाई मिट्टी, गाद, प्लास्टिक, पूजा सामग्री और दूसरे कचरे को वहीं छोड़ जाता है.
मानसून के दौरान गंगा का जलस्तर बढ़ने पर कई घाटों की सीढियां लंबे समय तक पानी में डूबी रहती हैं. पानी कम होने के बाद इन सीढ़ियों पर गीली मिट्टी और सिल्ट की मोटी परत जम जाती है. धीरे-धीरे यह गाद सूखकर कड़ी हो जाती है, जिसे सामान्य रोजाना सफाई से हटाना मुश्किल होता है.
बाढ़ का पानी केवल मिट्टी और गाद ही नहीं लाता. तेज बहाव के साथ प्लास्टिक, कपडे, पूजा सामग्री, लकड़ी और दूसरे प्रकार का कचरा भी घाटों तक पहुंच सकता है. यह सामान सीढ़ियों, किनारों और अलग-अलग हिस्सों में फंस जाता है. इसलिए बाढ़ उतरने के बाद सामान्य सफाई से अलग बड़े अभियान की जरूरत पड़ती है.
नगर निगम के सफाई कर्मचारी सामान्य दिनों में घाटों पर कचरा हटाने और साफ-सफाई का काम करते हैं लेकिन बाढ़ के बाद जमा होने वाली गाद और बड़ी मात्रा में कचरे को हटाना अलग तरह का काम है. इसके लिए ज्यादा कर्मचारियों, वाहनों और दूसरे संसाधनों की जरूरत पड़ सकती है. इसी वजह से विशेष सफाई अभियान चलाया जाता है.
मानसून और बाढ़ का पानी उतरने के बाद घाटों पर जमा गाद हटाने के लिए नगर निगम की ओर से विशेष सफाई कार्य कराया जाता है. इसके लिए जरूरत के अनुसार टेंडर के माध्यम से निजी एजेंसियों या ठेकेदारों को काम सौंपा जाता है. इस दौरान भारी मात्रा में जमा गाद और कचरे को हटाने पर विशेष ध्यान दिया जाता है.
वाराणसी के घाट धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं. देव दीपावली और अन्य बडे़ त्योहारों से पहले घाटों की सफाई पर खास ध्यान दिया जाता है. साफ सीढ़ियां होने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आने-जाने में सुविधा होती है और धार्मिक आयोजनों को भी व्यवस्थित तरीके से कराया जा सकता है.
दशाश्वमेध जैसे प्रमुख घाटों पर रोज गंगा आरती और दूसरे धार्मिक आयोजन होते हैं. बाढ़ के बाद अगर सीढियों पर गाद और कचरा जमा रह जाए तो श्रद्धालुओं को परेशानी हो सकती है. इसलिए पानी उतरने के बाद विशेष सफाई अभियान चलाकर घाटों को दोबारा व्यवस्थित किया जाता है.