अयोध्या: राम मंदिर प्रशासन और प्रबंधन को व्यवस्थित करने के लिए पहले CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है. इसके सीईओ यानी चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर से मंदिर से जुड़े प्रशासनिक और प्रबंधन के बड़े कामों की जिम्मेदारी संभालेंगे. खबरों के अनुसार, CEO के चयन के लिए बनाई गई समिति ने तीन अधिकारियों के नाम शॉर्टलिस्ट किए हैं. इन नामों को अब राम मंदिर ट्रस्ट के सामने रखा गया है. इस पर अंतिम फैसला ट्रस्ट की ओर से लिया जाएगा.
जो तीन नाम शॉर्टलिस्ट किए गए हैं उनमें उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय का नाम सबसे आगे चल रहा है. अगर ट्रस्ट उनके नाम पर मुहर लगाता है, तो वह राम मंदिर के पहले सीईओ बन सकते हैं. बता दें कि राजेश पांडेय कुछ साल पहले पुलिस सेवा से रिटायर हुए हैं. उन्होंने लंबे समय तक प्रशासनिक और पुलिस सेवाएं दी हैं. यही अनुभव इस अहम पद के लिए उनकी दावेदारी मजबूत बना रहा है.
राम मंदिर CEO के चयन की प्रक्रिया में राजेश पांडेय का दो बार इंटरव्यू भी हो चुका है. इसके बाद चयन समिति ने तीन नामों को अंतिम सूची में शामिल किया है. सूत्रों के अनुसार, प्रशासनिक अनुभव के अलावा राजेश पांडेय को मौजूदा सरकार के पसंदीदा अधिकारियों में भी गिना जाता रहा है. इसी वजह से उनका नाम इस दौड़ में सबसे आगे बताया जा रहा है.
राजेश पांडेय के अलावा पूर्व IAS अधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा और पूर्व बिहार DGP परेश सक्सेना के नाम भी संभावित उम्मीदवारों में बताए जा रहे हैं. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक राजेश पांडेय का नाम सबसे ऊपर माना जा रहा है.
राम मंदिर के पहले सीईोओ के सामने मंदिर से जुड़े प्रशासनिक, प्रबंधन और रोजमर्रा के बड़े स्तर के कामों को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी होगी. मंदिर में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या और बड़े स्तर की व्यवस्थाओं को देखते हुए इस पद को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. फिलहाल अंतिम फैसला राम मंदिर ट्रस्ट को लेना है. इसके बाद ही यह साफ होगा कि राम मंदिर के पहले CEO की जिम्मेदारी किस अधिकारी को मिलती है.