18 दिन की जांच में बदली कहानी, बहू शालू को फंसाने के आरोपों की खुली परतें; पुलिस ने तैयार की फाइनल रिपोर्ट
कानपुर के दवा कारोबारी विनीत मनोचा हत्याकांड में गिरफ्तार बहू शालू के पक्ष में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट तैयार कर ली है. पुलिस की जांच में हत्या से जुड़े साक्ष्य अब कारोबारी के बेटे सुब्रत से जुड़ने का दावा किया गया है.
कानपुर के दवा कारोबारी विनीत मनोचा हत्याकांड में गिरफ्तार उनकी बहू शालू को लेकर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. जांच में शालू के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं होने के बाद पुलिस ने उनके पक्ष में फाइनल रिपोर्ट तैयार कर ली है. हालांकि रिपोर्ट पर अभी अदालत की सुनवाई बाकी है. सुनवाई के बाद ही शालू की जेल से रिहाई का रास्ता साफ होगा. यह सुनवाई अब सोमवार को होने की संभावना है.
पुलिस ने शालू के पक्ष में चार बिंदुओं को आधार बनाकर अंतिम रिपोर्ट तैयार की है. पुलिस की जांच में सामने आया कि जिन साक्ष्यों के आधार पर शालू को गिरफ्तार किया गया था, उनका संबंध अब कारोबारी के बेटे सुब्रत से जुड़ रहा है. पुलिस के अनुसार, सुब्रत ने कथित तौर पर शालू को मामले में फंसाने की कोशिश की.
पुलिस पूछताछ में सुब्रत से जुड़े साक्ष्य
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के अनुसार, पूछताछ के दौरान सुब्रत जुआ, सट्टा, शराब पीने, दुकान में चोरी कराने, करीब 40 लाख रुपये के कर्ज और महिला मित्र से जुड़ी बातों को स्वीकार कर रहा था, लेकिन हत्या की साजिश में शामिल होने से इनकार कर रहा था.
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पुलिस ने उसके सामने डिजिटल और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का जिक्र किया. इसमें CDR, कॉल रिकॉर्डिंग, डिलीट किए गए मैसेज और विशाल के बयान समेत अन्य साक्ष्य शामिल बताए गए. पुलिस के मुताबिक इन साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तारी की जा सकती थी. इसके बाद सुब्रत ने कथित तौर पर अपराध में अपनी भूमिका स्वीकार की.
शालू की गिरफ्तारी के पीछे क्या था आधार?
पांच सितंबर को कल्याणपुर के इंदिरा नगर स्थित रतन ऑर्बिट के फ्लैट नंबर C-104 में दवा कारोबारी विनीत मनोचा का रक्तरंजित शव मिला था. उनके गले और शरीर पर चाकू के 17 गंभीर घाव मिले थे.
जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पूर्व नौकर विशाल गौतम और उसके साथी को गिरफ्तार किया था. पुलिस के मुताबिक विशाल ने शालू के कहने पर हत्या करने की बात कही थी. इसके बाद शालू को भी गिरफ्तार किया गया.
पुलिस के अनुसार, शालू के खिलाफ उस समय विशाल के बयान, सिक्योरिटी गार्ड को गलत नाम बताकर अपार्टमेंट में प्रवेश, घर की CCTV रिकॉर्डिंग बंद कराने और छह लाख रुपये की सुपारी देने जैसे आरोपों को आधार बनाया गया था.
18 दिन की जांच में बदली कहानी
पुलिस के मुताबिक करीब 18 दिनों तक चली जांच के दौरान यही साक्ष्य सुब्रत से जुड़ते चले गए. पुलिस का दावा है कि हत्या की साजिश में सुब्रत की भूमिका सामने आई और शालू को मामले में फंसाए जाने के संकेत मिले.
गुरुवार को पुलिस ने सुब्रत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और शालू के खिलाफ अंतिम रिपोर्ट लगाने की बात कही. शुक्रवार को शालू के परिजन अदालत में फाइनल रिपोर्ट दाखिल होने का इंतजार करते रहे, लेकिन रिपोर्ट दाखिल नहीं हो सकी. अब सोमवार को इस पर सुनवाई होने की संभावना है.