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सीतापुर में बनेगा देश का पहला वेदारण्यम पार्क, 2 लाख पौधों के बीच दिखेगा अध्यात्म का अद्भुत संसार

सीतापुर के नैमिषारण्य में देश का पहला पारिस्थितिकी आध्यात्मिक पार्क वेदारण्यम विकसित किया जा रहा है. 14.09 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस पार्क में करीब दो लाख पौधे लगाए जाएंगे और सात थीम आधारित जोन के जरिए वैदिक संस्कृति, ऋषि परंपरा और प्रकृति का संगम दिखाया जाएगा.

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Edited By: Babli Rautela
सीतापुर में बनेगा देश का पहला वेदारण्यम पार्क, 2 लाख पौधों के बीच दिखेगा अध्यात्म का अद्भुत संसार
Courtesy: AI

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में पर्यटन और आध्यात्मिकता को नई पहचान देने वाली एक बड़ी परियोजना पर काम शुरू हो गया है. विश्व प्रसिद्ध तीर्थ नैमिषारण्य के ठाकुरनगर में देश का पहला पारिस्थितिकी आध्यात्मिक पार्क वेदारण्यम विकसित किया जा रहा है. करीब 14.09 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाला यह पार्क श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बनने की तैयारी में है.

वेदारण्यम को प्रकृति और आध्यात्मिकता के ऐसे संगम के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां लोगों को वैदिक संस्कृति और ऋषि परंपरा के साथ प्रकृति को करीब से समझने का मौका मिलेगा. फिलहाल परियोजना स्थल पर जमीन को समतल करने का काम शुरू हो चुका है.

10 हेक्टेयर में लगाए जाएंगे दो लाख पौधे

वेदारण्यम पार्क करीब 10 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जाएगा. यहां अलग अलग प्रजातियों के करीब दो लाख पौधे लगाए जाने की योजना है. पार्क को इस तरह तैयार किया जाएगा कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को प्रकृति के बीच आध्यात्मिक अनुभव मिल सके. वन विभाग की कार्ययोजना के अनुसार पार्क को जहां प्रकृति अनादि ज्ञान से मिलती है थीम पर विकसित किया जा रहा है. इसका उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ना भी है. परियोजना के पहले चरण के लिए छह करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत हो चुकी है. पूरे पार्क के विकास पर करीब 14.09 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं.

वैदिक वृक्षों से सजेगा पार्क

वेदारण्यम में करीब 30 प्रतिशत क्षेत्र में वैदिक वृक्ष लगाए जाएंगे. इनमें पीपल, बरगद, बेल, आंवला और शमी जैसे पेड़ों को प्रमुखता दी जाएगी. इन पेड़ों का भारतीय परंपरा और धार्मिक मान्यताओं में विशेष महत्व माना जाता है. पार्क में देश के अलग अलग प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों से जुड़ी वटवृक्ष परंपरा को भी दर्शाया जाएगा. इसके तहत प्रयाग के अक्षयवट, नासिक के पंचवट, वृंदावन के वंशीवट, गया के गयावट और उज्जैन के सिद्धवट की कलम से वटवृक्ष तैयार किए जाएंगे.

बाकी क्षेत्र में औषधीय पौधों के साथ वैदिक काल की झलक देने वाली संरचनाओं को विकसित किया जाएगा. इससे पार्क केवल घूमने की जगह नहीं रहेगा, बल्कि भारतीय परंपरा और प्राकृतिक विरासत को समझने का माध्यम भी बनेगा.

सात जोन होंगे वेदारण्यम की पहचान

वेदारण्यम को सात अलग अलग थीम आधारित जोन में विकसित किया जाएगा. हर जोन का अपना अलग उद्देश्य और आकर्षण होगा. पहले जोन में बड़ी संख्या में वैदिक वृक्ष लगाए जाएंगे. यहां 1.57 लाख से अधिक वैदिक वृक्षों को विकसित करने की योजना है. दूसरे जोन में ऋषियों की जीवनशैली और उनकी परंपराओं को अनुभव करने का अवसर मिलेगा. तीसरे जोन में सूत गद्दी, ऋषि सभा, भ्रमण पथ और वैदिक ध्वनियों से जुड़ी व्यवस्था होगी.

चौथे जोन को मंत्र चिकित्सा की थीम पर तैयार किया जाएगा. यहां मंत्रों से जुड़े शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक पहलुओं की जानकारी दी जाएगी.