राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था. वे ऐसे परिवार में बड़े हुए, जिसकी भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका रही. उनके नाना जवाहरलाल नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री थे, जबकि उनकी मां इंदिरा गांधी भी प्रधानमंत्री बनीं. बचपन का काफी समय उन्होंने दिल्ली के तीन मूर्ति भवन में बिताया.
राजीव गांधी की पहली पसंद कभी भी राजनीति नहीं थी. उन्होंने देहरादून के दून स्कूल में पढ़ाई की और आगे की शिक्षा ब्रिटेन से प्राप्त किया. उन्हें विज्ञान और तकनीक में काफी दिलचस्पी थी. संगीत और फोटोग्राफी के साथ उनका सबसे बड़ा जुनून विमान उड़ाना.
राजीव गांधी ब्रिटेन से लौटने के बाद दिल्ली फ्लाइंग क्लब की परीक्षा पास की और कमर्शियल पायलट का लाइसेंस हासिल किया. इसके बाद वे इंडियन एयरलाइंस में पायलट बन गए. उस समय उन्होंने शायद ही सोचा होगा कि एक दिन वे देश के प्रधानमंत्री बनेंगे. लेकिन 1980 में विमान दुर्घटना में छोटे भाई संजय गांधी की मौत के बाद उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया. परिवार और पार्टी की परिस्थितियों के बीच उन्होंने राजनीति में कदम रखा और अमेठी से लोकसभा उपचुनाव जीतकर संसद पहुंचे.
राजीव गांधी के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई. इसके बाद देश गहरे संकट में था. इसी मुश्किल समय में 40 साल की उम्र में राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद संभाला. इसके बाद हुए आम चुनाव में कांग्रेस को भारी जीत मिली. उस समय पार्टी ने 508 में से 401 लोकसभा सीटें जीतीं. राजीव गांधी का लक्ष्य भारत को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाना था. इसके लिए वे विज्ञान, शिक्षा, कंप्यूटर और दूरसंचार को आधार मानते थे. उनके कार्यकाल को भारत में तकनीकी और कंप्यूटर क्षेत्र के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण दौर माना जाता है.
प्रधानमंत्री के रूप में राजीव गांधी को पंजाब, असम और श्रीलंका से जुड़ी गंभीर राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद उन्होंने युवा शक्ति, विज्ञान और तकनीक को आगे बढ़ाने पर जोर दिया. उनका सपना था कि भारत दुनिया के अग्रणी देशों की कतार में शामिल हो और मानव जाति की सेवा करे.
राजीव गांधी का जीवन 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बुदूर में एक चुनावी सभा के दौरान खत्म हो गया. एक महिला के आत्मघाती हमले में राजीव गांधी समेत 16 लोगों की मौत हुई. जांच में श्रीलंका के तमिल उग्रवादी संगठन LTTE की साजिश सामने आई. जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस हमले की योजना संगठन के प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरण के नेतृत्व में तैयार की गई थी.
राजीव गांधी की राजनीतिक यात्रा बेहद छोटी रही, लेकिन उसका प्रभाव लंबे समय तक दिखाई दिया. पायलट के कॉकपिट से प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचे राजीव गांधी ने भारत को 21वीं सदी के लिए तैयार करने का सपना देखा. हर साल 20 अगस्त को उनकी जयंती सद्भावना दिवस के रूप में मनाई जाती है.