नई दिल्ली: ईपीएफओ ईडीएलआई योजना के तहत नौकरी के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को सुरक्षा मिल सकती है. ईडीएलआई बीमा में कर्मचारी से कोई प्रीमियम नहीं लिया जाता. इसकी राशि मृत्यु से पहले के बारह महीनों के औसत वेतन और भविष्य निधि खाते के औसत शेष के आधार पर तय होती है. नियमों के अनुसार अधिकतम लाभ सात लाख रुपये तक पहुंच सकता है. नामांकित व्यक्ति या कानूनी वारिस को यह राशि भी मिल सकती है.
कर्मचारी जमा संबद्ध बीमा योजना के तहत मिलने वाली राशि केवल वेतन देखकर तय नहीं होती. इसमें पिछले बारह महीनों के औसत वेतन के साथ भविष्य निधि खाते में जमा औसत शेष राशि को भी गणना में शामिल किया जाता है. नियमों के अनुसार औसत मासिक वेतन की गणना अधिकतम 15,000 रुपये तक की जाती है. इसके बाद औसत वेतन का 35 गुना लिया जाता है. इसके साथ पिछले बारह महीनों के औसत भविष्य निधि शेष का 50 प्रतिशत भी जोड़ा जाता है. इस अतिरिक्त हिस्से की अधिकतम सीमा 1.75 लाख रुपये है. पूरी गणना के बाद बीमा लाभ की अधिकतम सीमा सात लाख रुपये निर्धारित है.
मान लीजिए किसी कर्मचारी का गणना योग्य औसत मासिक वेतन 15,000 रुपये है. ऐसी स्थिति में मूल गणना इस प्रकार होगी:
इसलिए केवल 15,000 रुपये वेतन होने से हर मामले में सीधे सात लाख रुपये मिलना तय नहीं है. वास्तविक भुगतान खाते के औसत शेष और लागू नियमों के आधार पर निर्धारित होता है.
ईडीएलआई योजना की खास बात यह है कि इसके लिए कर्मचारी को अलग से बीमा प्रीमियम जमा नहीं करना पड़ता. योजना में नियोक्ता की ओर से योगदान किया जाता है और पात्र भविष्य निधि सदस्य इसके दायरे में आते हैं. इसका उद्देश्य नौकरी के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को आर्थिक सहारा देना है. इसलिए भविष्य निधि खाता रखने वाले कर्मचारियों के लिए नामांकन की जानकारी सही रखना बेहद जरूरी है.
कर्मचारी की मृत्यु होने पर योजना के नियमों के अनुसार नामांकित व्यक्ति या कानूनी वारिस बीमा लाभ का दावा कर सकता है. दावा करते समय संबंधित दस्तावेजों और आवश्यक प्रमाणों की जरूरत पड़ती है. ईडीएलआई से जुड़े दावे के लिए निर्धारित दावा प्रपत्र जमा करना होता है. नियोक्ता द्वारा सत्यापन की व्यवस्था होती है और आवश्यक स्थिति में सक्षम अधिकारी से सत्यापन कराया जा सकता है.
दावा करने वाले व्यक्ति को कर्मचारी की भविष्य निधि जानकारी, नामांकन और बैंक खाते से जुड़े विवरण सही रखने चाहिए. दस्तावेजों में किसी तरह की कमी होने पर दावे की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. ईपीएफओ के सदस्य पोर्टल पर मृत्यु संबंधी दावे के लिए नामांकित व्यक्ति के लिए अलग सुविधा उपलब्ध है. इसलिए कर्मचारियों को अपने भविष्य निधि खाते में नामांकन की जानकारी समय समय पर जांचनी चाहिए. परिवार के सदस्यों को भी इस सुविधा और दावा प्रक्रिया की जानकारी देना उपयोगी रहेगा.