बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव पर इस समय मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा है. दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को चेक-बाउंस मामले में सजा की डेडलाइन बढ़ाने से मना कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने जेल के अधिकारियों के सामने सरेंडर कर दिया. हालांकि उससे पहले उन्होंने 50 लाख रुपये के इंतजाम हो जाने की बात कही और एक और हफ्ते का समय मांगा था.
राजपाल यादव ने कोर्ट से सरेंडर के लिए समय बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उनकी अर्जी को खारिज कर दिया. अदालत की ओर से कहा गया कि उन्हें राहत देने का कोई आधार नहीं हैं और उन्हें बुधवार शाम 4 बजे तक सरेंडर करने का निर्देश दे दिया.
चेक बाउंस करना कोई सामान्य घटना नहीं है बल्कि अगर ऐसा बार-बार होता है तो भारतीय कानून के मुताबिक यह आपके लिए खतरे की घंटी है. आइए आज हम समझते हैं क्या होता है चेक बाउंस और कब इस मामले में आपको जेल हो सकता है. चेक तब बाउंस होता है जब बैंक अकाउंट में आपके पास उतनी रकम ना हो, जितने का चेक आपने किसी को दिया हो. क्लियरटैक्स के अनुसार, चेक बाउंस नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 के सेक्शन 138 के तहत एक आता है, जिसकी सजा चेक की रकम का दोगुना तक जुर्माना, दो साल तक की जेल या दोनों हो सकती है. चेक बाउंस नोटिस में 15 दिनों का समय दिया जाता है, जिसमें चेक की सही रकम चुकाने की मांग की जाती है.
राजपाल यादव का मामला आज नहीं बल्कि 2010 का है. जब पॉपुलर बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव ने अपनी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म 'अता पता लापता' के लिए कैमरे के पीछे कदम रखा था. इस दौरान उन्होंने प्रोजेक्ट को फंड करने के लिए, मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ उधार लिए थे. जब फिल्म बॉक्स ऑफिस पर मार खा गई, तो पेमेंट करना मुश्किल हो गया. हालांकि समय के साथ, इंटरेस्ट, पेनल्टी और देरी ने बकाया रकम को लगभग 9 करोड़ तक पहुंचा दिया.
एक्टर ने इसे चुकाने के लिए कुछ चेक दिए, जो बाद में बाउंस हो गया और आखिरकार उनपर क्रिमिनल केस चलाए गए. दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें काफी समय दिया, लेकिन वे समय-सीमा पर पूरा नहीं कर पाए. जिसके बाद अब कोर्ट ने आखिरकार यादव की जेल से बचने की आखिरी कोशिश को खारिज कर दिया. जिसके बाद उन्होंने सरेंडर कर दिया.