उत्तर प्रदेश के 1663 थानों में स्थापित हुए मिशन शक्ति केंद्र, महिलाओं को हो रहे ये लाभ

उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पिंक बूथ, एंटी रोमियो स्क्वाड और मिशन शक्ति जैसे पहलों ने बड़ा असर दिखाया है. शिकायतों में 60 प्रतिशत कमी आई है और महिलाओं में आत्मविश्वास तेजी से बढ़ा है.

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Kuldeep Sharma

लखनऊ: महिला सुरक्षा को लेकर उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है. पिंक बूथ, एंटी रोमियो स्क्वाड, महिला बीट अधिकारी और मिशन शक्ति जैसे प्रयासों ने न सिर्फ अपराध नियंत्रित किए हैं, बल्कि महिलाओं को घर से लेकर कार्यस्थल तक सुरक्षित माहौल देने में अहम भूमिका निभाई है. 

इस व्यापक व्यवस्था ने पुलिस के त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को भी और बेहतर बनाया है. परिणामस्वरूप, प्रदेश का महिला सुरक्षा मॉडल अब देशभर में एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है.

महिला सुरक्षा को नए आयाम देने की पहल

राज्य के सभी 1663 थानों में मिशन शक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां महिलाओं की शिकायतों को त्वरित और संवेदनशील तरीके से सुना जाता है. महिला बीट अधिकारी नियमित रूप से फील्ड में रहकर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर रही हैं. इससे शिकायतों के समाधान की रफ्तार बढ़ी है और पुलिस पर भरोसा भी गहरा हुआ है.

पिंक बूथ और एंटी रोमियो स्क्वाड का बढ़ता प्रभाव

सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पिंक बूथ और एंटी रोमियो स्क्वाड की नियमित गश्त का बड़ा असर दिखाई दिया है. राज्य में छेड़छाड़ और उत्पीड़न के मामलों में 60 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. दिसंबर 2024 तक 1.4 करोड़ लोगों को चेतावनी दी गई और 32,077 लोगों पर चालान किया गया.

असामाजिक तत्वों पर कड़ी कार्रवाई

पुलिस ने सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं को असुरक्षित माहौल देने वाले तत्वों पर निर्णायक कदम उठाए हैं. अब तक 3,972 असामाजिक तत्व गिरफ्तार किए जा चुके हैं. इसके अलावा तीन लाख से अधिक लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर चेतावनी देकर नियंत्रित किया गया, जिससे सड़कों पर अनुशासन और सुरक्षा दोनों मजबूत हुए हैं.

फर्स्ट रिस्पॉन्डर नेटवर्क की बड़ी भूमिका

महिलाओं के लिए विकसित फर्स्ट रिस्पॉन्डर नेटवर्क ने आपात स्थितियों में तत्काल सहायता देने का मार्ग आसान बनाया है. 1090 वीमेन पावर लाइन और SOS रैपिड रिस्पॉन्स टीमों ने कई मामलों में मिनटों में मदद पहुंचाकर भरोसे को और मजबूत किया है. इसी तरह 112 इमरजेंसी लाइन की पहुंच भी तेज और व्यापक हुई है.

सुरक्षा से आत्मविश्वास तक का बदलाव

सरकार के प्रयासों ने यह संदेश स्पष्ट किया है कि महिला सुरक्षा कोई सुविधा नहीं, बल्कि अधिकार है. घरेलू हिंसा और यौन अपराधों के मामलों में तेजी से कार्रवाई की जा रही है और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है. इन पहलों ने महिलाओं में यह विश्वास जगाया है कि वे अब निर्भय होकर घर, सड़क और कार्यस्थल पर अपनी जिम्मेदारियां निभा सकती हैं.