उत्तर प्रदेश में फिलहाल मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है. मौसम विभाग के अनुसार उत्तरी ओडिशा तट के समीप उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव से प्रदेश में मानसूनी सक्रियता में कमी आई है. इसका असर यह होगा कि राज्य के अधिकांश हिस्सों में अगले दो दिनों तक बारिश की गतिविधियां सीमित रहेंगी और लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ेगा.
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस दौरान तापमान में मामूली बढ़ोतरी के साथ वातावरण में नमी का स्तर भी अधिक रहेगा, जिससे गर्मी का अहसास सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा होगा.
मौसम विज्ञान केंद्र के अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में फिलहाल कोई अन्य प्रभावी मौसम तंत्र सक्रिय नहीं है. यही वजह है कि आगामी दो दिनों तक मानसून की गतिविधियां मुख्य रूप से पश्चिमी और दक्षिणी जिलों तक सीमित रहेंगी. उन्होंने बताया कि बारिश कम होने से वातावरण में आर्द्रता बढ़ेगी, जिससे विशेष रूप से पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश के जिलों में उमस लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है. दिन के साथ-साथ रात के समय भी गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है.
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान कई जिलों में उमस भरी गर्मी बने रहने की संभावना जताई है. इनमें प्रतापगढ़, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, अयोध्या और अंबेडकर नगर सहित आसपास के इलाके शामिल हैं. इन क्षेत्रों में लोगों को तेज धूप के साथ अधिक नमी के कारण असहज मौसम का सामना करना पड़ सकता है. विशेषज्ञों ने दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी है.
मौसम विभाग का अनुमान है कि वर्तमान स्थिति लंबे समय तक नहीं रहेगी. अगले दो दिनों के बाद प्रदेश में मानसूनी गतिविधियों में दोबारा तेजी आने की संभावना है. इसके बाद कई इलाकों में बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है, जिससे तापमान में गिरावट आने और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है. हालांकि, तब तक लोगों को गर्मी और नमी के दोहरे प्रभाव का सामना करना पड़ सकता है. प्रदेश के कई जिलों में शनिवार को अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया गया.