यूपी में ऐसे शिक्षकों पर गिरेगी गाज! हाईकोर्ट के आदेश के बाद योगी सरकार ने की बर्खास्तगी और वेतन वसूली की तैयारी

इलाहाबाद हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद उत्तर प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी पाने वाले सहायक शिक्षकों के खिलाफ व्यापक जांच शुरू हुई है. छह माह में जांच पूरी कर दोषियों की सेवा समाप्ति और वेतन वसूली होगी.

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Kanhaiya Kumar Jha

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में शुचिता बहाल करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक आदेश दिया है. इसके तहत प्रदेशभर के बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में नियुक्त सहायक शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की सघन जांच की जाएगी. शासन ने सभी मंडलों को संदिग्ध शिक्षकों की सूची एक महीने में सौंपने का निर्देश दिया है. यह कदम उन लोगों को बाहर करने के लिए उठाया गया है, जिन्होंने जाली दस्तावेजों या तथ्यों को छिपाकर वर्षों से अवैध रूप से सरकारी सेवा प्राप्त की है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गरिमा सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि बड़ी संख्या में शिक्षक बनावटी दस्तावेजों के सहारे नियुक्त हुए हैं. कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का आदेश दिया है. अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा को पत्र भेजकर इस अभियान को तत्काल प्रभावी बनाने को कहा है. अब सभी नियुक्तियों की बारीकी से दोबारा पड़ताल की जाएगी.

मंडलीय स्तर पर बनेगी सूची 

जांच की जिम्मेदारी सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों को सौंपी गई है. उन्हें अपने अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाले सभी संदिग्ध मामलों की एक विस्तृत सूची तैयार करनी होगी. इस सूची में शिक्षक का नाम, नियुक्ति की तिथि, फर्जी पाए गए दस्तावेजों का विवरण और उन्हें जारी करने वाली संस्था की जानकारी अनिवार्य रूप से शामिल होगी. शासन ने स्पष्ट किया है कि एक माह के भीतर यह प्राथमिक सूची शासन को सौंपना आवश्यक है.

छह महीने की समयसीमा तय 

पूरी जांच प्रक्रिया को छह महीने के भीतर संपन्न करने का कड़ा लक्ष्य रखा गया है. शासन का मानना है कि पहले भी ऐसे निर्देश दिए गए थे, लेकिन निचले स्तर के अधिकारियों की लापरवाही के कारण प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी. इस बार राज्य स्तर पर समन्वित और समयबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं ताकि कोई भी दोषी बच न सके. इससे न केवल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी, बल्कि छात्रों के हितों की रक्षा भी होगी.

अफसरों की मिलीभगत पर गाज 

हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में संस्थानों के प्रबंधन और बेसिक शिक्षा अधिकारियों की मिलीभगत या लापरवाही की आशंका भी जताई है. आदेश के मुताबिक यदि किसी अधिकारी की ढिलाई सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कठोर विभागीय और दणात्मक कार्रवाई की जाएगी. कोर्ट ने माना है कि जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण ही फर्जी शिक्षक वर्षों तक तंत्र का हिस्सा बने रहे, जिससे सरकारी खजाने और शिक्षा की गरिमा को भारी नुकसान पहुंचा है.

वेतन वसूली और सख्त सजा 

अनुच्छेद 226 के तहत कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि फर्जी प्रमाणपत्रों वाले शिक्षकों की सेवा तत्काल समाप्त की जाए. इतना ही नहीं, उन्होंने अब तक सरकार से जो भी वेतन प्राप्त किया है, उसकी पूरी वसूली की जाएगी. यह उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो गलत तरीके से व्यवस्था में घुसने की कोशिश करते हैं. इस अभियान से राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति एक बार फिर धरातल पर दिखाई दे रही है.