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यूपी के लोकल हुनर का दुनिया में डंका, योगी सरकार की इस योजना ने बदल दी लाखों कारीगरों की तकदीर

उत्तर प्रदेश की 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट' (ODOP) योजना ने स्थानीय कारीगरों और पारंपरिक उत्पादों को नई पहचान दी है. सरकार के अनुसार, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग, वित्तीय सहायता और बेहतर मार्केटिंग के जरिए प्रदेश के उत्पाद अब राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार तक पहुंच रहे हैं.

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Edited By: Reepu Kumari
यूपी के लोकल हुनर का दुनिया में डंका, योगी सरकार की इस योजना ने बदल दी लाखों कारीगरों की तकदीर
Courtesy: Pinterest

उत्तर प्रदेश के गांवों और कस्बों में बनने वाले पारंपरिक उत्पाद कभी सीमित बाजार तक ही पहुंच पाते थे. बेहतर मार्केटिंग और ब्रांडिंग के अभाव में कारीगरों को उनके हुनर का उचित मूल्य नहीं मिल पाता था. राज्य की योगी सरकार का कहना है कि 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट' (ODOP) योजना ने इस स्थिति को बदलने का काम किया है और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का रास्ता तैयार किया है.

सरकार के मुताबिक, 2018 में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य हर जिले की पारंपरिक पहचान को मजबूत करना और कारीगरों को प्रशिक्षण, टूलकिट, वित्तीय सहायता तथा बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है. दावा किया गया है कि योजना के जरिए लाखों लोगों को रोजगार मिला है, निर्यात में बढ़ोतरी हुई है और प्रदेश के कई उत्पाद अब वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं.

हर जिले के उत्पाद को मिली नई पहचान

ODOP योजना के तहत उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले के विशेष उत्पाद को बढ़ावा दिया जा रहा है. सरकार के अनुसार, योजना का मकसद केवल उत्पाद बेचना नहीं, बल्कि स्थानीय उद्योगों को मजबूत बनाना है. इसके लिए कारीगरों को प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, वित्तीय सहयोग और मार्केटिंग का समर्थन दिया जा रहा है. साथ ही मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना के माध्यम से पांच लाख रुपये तक का बीमा सुरक्षा कवच भी उपलब्ध कराया जा रहा है.

लोकल बाजार से ग्लोबल मार्केट तक पहुंच

सरकार का दावा है कि पहले जो उत्पाद स्थानीय मंडियों तक सीमित रहते थे, वे अब देश और विदेश के बाजारों में पहुंच रहे हैं. विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, बीते वर्षों में 1.46 लाख से अधिक कारीगरों को प्रशिक्षण दिया गया, जबकि 20 हजार से अधिक उद्यमियों ने सीधे इस योजना का लाभ लिया. सरकार का कहना है कि इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं.

निर्यात और जीआई टैग से मिली नई मजबूती

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017-18 में प्रदेश का कुल निर्यात लगभग 86 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. सरकार का कहना है कि इसमें ODOP और हस्तशिल्प उत्पादों की अहम हिस्सेदारी है. इसके अलावा प्रदेश के 79 उत्पादों को जीआई टैग मिलने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान और मजबूत हुई है.

कई जिलों के कारीगरों ने साझा किए अनुभव

मुरादाबाद के पीतल उद्योग से जुड़े लोगों को कहना है कि योजना के जरिए मार्केटिंग और ब्रांडिंग मिलने से उत्पादों की मांग बढ़ी है. वहीं अमरोहा के कारीगरों का कहना है कि ODOP में शामिल होने के बाद कारोबार का दायरा बढ़ा है. उनका दावा है कि अब उन्हें मशीन, कच्चा माल और बाजार तक पहुंच बनाने में पहले की तुलना में अधिक सुविधा मिल रही है.

ब्रांडिंग और पैकेजिंग से बढ़ा भरोसा

ODOP के तहत उत्पादों की पैकेजिंग, डिजाइन और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. सरकार का कहना है कि इससे ग्राहकों का भरोसा बढ़ा है और स्थानीय उत्पाद पेशेवर रूप में बाजार में उतर रहे हैं. मुरादाबाद का मेटल क्राफ्ट, वाराणसी की सिल्क साड़ी, भदोही का कालीन, कन्नौज का इत्र और अलीगढ़ के ताले जैसे उत्पाद अब उत्तर प्रदेश की वैश्विक पहचान को मजबूत कर रहे हैं.