यूपी में कारोबारियों के लिए सख्त हुए नियम, श्रम कानूनों में बड़े बदलाव की तैयारी; अब हर कर्मचारी को मिलेगा अधिकार
उत्तर प्रदेश सरकार ने नई श्रम नियमावली 2026 का मसौदा जारी किया है. इसके तहत ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य होगा और कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों को मजबूत किया जाएगा.
लखनऊ: UP में योगी के सरकार ने निजी प्रतिष्ठानों में काम करने वाले श्रमिकों और कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. अब सभी प्रतिष्ठानों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य है. यह शर्त उन प्रतिष्ठानों के लिए अनिवार्य है जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं.
कर्मचारियों की संख्या के आधार पर निर्धारित पंजीकरण शुल्क जमा करना होगा. 'व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें नियम, 2026' का मसौदा आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया गया है. जैसे ही यह नया ढांचा लागू होगा, UP में वर्तमान में लागू आठ मौजूदा श्रम कानून निरस्त हो जाएंगे और उनकी जगह एक एकल, एकीकृत श्रम संहिता लागू होगी.
कैसे तैयार किए गए ये नियम?
ये नियम 'व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें संहिता, 2020' के अनुरूप तैयार किए गए हैं. सरकार ने इस मसौदे के संबंध में 45 दिनों की अवधि के भीतर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं. नए प्रावधानों के तहत सभी कारखानों, निर्माण स्थलों और अन्य प्रतिष्ठानों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है.
कितना लगेगा विलंब शुल्क?
निर्धारित समय सीमा के भीतर पंजीकरण न कराने पर 10 प्रतिशत का वार्षिक विलंब शुल्क लगेगा. इसके अतिरिक्त प्रतिष्ठानों को पोर्टल पर अपने सभी विवरण अद्यतन यानी अपडेट रखने होंगे और किसी भी बदलाव की सूचना 30 दिनों के भीतर देनी होगी.
खतरनाक उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों के लिए क्या नियम?
ये नियम नियोक्ताओं की जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हैं. कार्यस्थल पर किसी भी दुर्घटना के जोखिम को समाप्त करने के लिए मशीनरी और उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा. लगातार चलने वाली मशीनरी और कन्वेयर बेल्ट पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए, काम के घंटों और संचालन की गति के संबंध में विशिष्ट सीमाएं निर्धारित की जाएंगी. ऐसे कार्यों के लिए सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा.
स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए क्या है नियम?
स्वास्थ्य सुरक्षा प्रावधानों के तहत 45 वर्ष और उससे अधिक आयु के कर्मचारियों के लिए वार्षिक चिकित्सा जांच अनिवार्य कर दी गई है. इन नियमों में खतरनाक उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों के लिए विशेष स्वास्थ्य जांच का भी एक विशिष्ट प्रावधान शामिल है. पांच मंजिल या 20 मीटर से ज्यादा ऊंचाई वाली इमारतों के लिए यह ज़रूरी होगा कि वे एक इमरजेंसी प्लान बनाएं और अपने कर्मचारियों को सुरक्षा ट्रेनिंग दें.
अपॉइंटमेंट लेटर जरूरी
नए नियमों के तहत अपॉइंटमेंट की प्रक्रिया को भी ज्यादा पारदर्शी बनाया गया है. हर कर्मचारी को काम शुरू करने से पहले एक अपॉइंटमेंट लेटर दिया जाना चाहिए. एक महीने के अंदर पहचान पत्र जारी करना भी जरूरी कर दिया गया है. किसी भी दुर्घटना या मौत की स्थिति में मालिक को तुरंत ऑनलाइन जानकारी देना जरूरी है. इस जानकारी में यह साफ किया गया है कि प्रकाशन की तारीख से 45 दिनों के अंदर प्रिंसिपल सेक्रेटरी यानी श्रम या श्रम कमिश्नर को दिए गए सुझावों और आपत्तियों पर ही विचार किया जाएगा. इसके बाद नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा और लागू किया जाएगा.
ये पुराने नियम कर दिए जाएंगे खत्म
कॉन्ट्रैक्ट लेबर नियम 1975, इंटर-स्टेट माइग्रेंट वर्कमैन नियम 1981, बीड़ी और सिगार वर्कर नियम 1969, फैक्ट्री नियम 1950, फैक्ट्री सुरक्षा अधिकारी नियम 1984, भवन और अन्य निर्माण श्रमिक नियम 2009.
कितना है रजिस्ट्रेशन फीस?
10 से 20 कर्मचारी – ₹500
20 से 100 कर्मचारी – ₹1,000
100 से 500 कर्मचारी – ₹15,000
500 से 1,000 कर्मचारी – ₹25,000
1,000 से ज्यादा कर्मचारी – ₹100,000
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