लखनऊ: उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है और इसमें राजधानी लखनऊ का अहम रोल है. यूपी वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में लगातार काम कर रहा है. इस लक्ष्य को हासिल करने में लखनऊ की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण बताई जा रही है.
वित्त राज्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि राजधानी की मजबूत अर्थव्यवस्था पूरे प्रदेश की जीडीपी को नई ऊंचाई दे रही है. लखनऊ की अर्थव्यवस्था फिलहाल 1.68 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है. यह प्रदेश की कुल जीडीपी में 5.56 प्रतिशत का योगदान दे रही है. विकास की रफ्तार के हिसाब से लखनऊ पूरे उत्तर प्रदेश में चौथे स्थान पर है.
लखनऊ की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र पर टिकी हुई है. यहां सेवा क्षेत्र का योगदान 62.76 प्रतिशत है. इसके बाद औद्योगिक क्षेत्र 30.14 प्रतिशत और कृषि व संबद्ध क्षेत्र मात्र 7.10 प्रतिशत का योगदान दे रहे हैं. शहर में बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं मौजूद हैं। केजीएमयू, एसजीपीजीआई जैसे बड़े सरकारी अस्पतालों के अलावा कई निजी अस्पताल भी मरीजों की सेवा कर रहे हैं.
शिक्षा और शोध के क्षेत्र में भी लखनऊ काफी आगे है. अच्छे कॉलेज, विश्वविद्यालय और रिसर्च संस्थान युवाओं को नई दिशा दे रहे हैं. आईटी और सेवा क्षेत्र, रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और एमएसएमई उद्योगों ने भी लखनऊ की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है. शहर में नए-नए निवेश आ रहे हैं. सड़कें, मेट्रो, एयरपोर्ट और अन्य सुविधाओं के विस्तार से व्यवसाय बढ़ रहा है.
लखनऊ में 58,300 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव स्वीकृत हुए हैं. इन प्रस्तावों से औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और सेवा क्षेत्र को और बढ़ावा मिलेगा. अधिकारियों का कहना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से युवाओं को अच्छे अवसर मिलेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी.
मंत्री सुरेश कुमार खन्ना का मानना है कि लखनऊ अगर और तेजी से आगे बढ़ा तो यूपी को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने में बड़ी मदद मिलेगी. राजधानी न सिर्फ अपनी अर्थव्यवस्था सुधार रही है बल्कि पूरे प्रदेश को विकास की राह दिखा रही है. सरकार सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं पर लगातार काम कर रही है. लखनऊ में बढ़ते निवेश, बेहतर कानून व्यवस्था और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने यहां का माहौल निवेशकों के अनुकूल बनाया है.