सालों से बंद पड़े कॉलेज हॉस्टल अब बनेंगे करियर की फैक्ट्री, छात्रों को मिलेगा बड़ा फायदा

उत्तर प्रदेश के राजकीय और एडेड डिग्री कॉलेजों में सालों से खाली पड़े छात्रावासों का अब शैक्षणिक और रोजगारपरक गतिविधियों के लिए उपयोग किया जाएगा. नए सत्र 2026-27 से यहां जॉब ओरिएंटेड कोर्स, पुस्तकालय और प्रयोगशालाएं शुरू की जाएंगी.

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Babli Rautela

उत्तर प्रदेश के राजकीय और एडेड डिग्री कॉलेजों में वर्षों से खाली पड़े छात्रावास अब शिक्षा और रोजगार के नए केंद्र बनेंगे. उच्च शिक्षा विभाग ने इन भवनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. नए शैक्षिक सत्र 2026-27 से इन छात्रावासों में रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की कक्षाएं संचालित की जाएंगी. साथ ही जरूरत के अनुसार पुस्तकालय और प्रयोगशालाओं की भी स्थापना की जाएगी. यह कदम न केवल सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि छात्रों को नए अवसर प्रदान करने में भी मददगार साबित होगा.

सालों से खाली पड़े हैं कई छात्रावास

राजकीय और एडेड डिग्री कॉलेजों में बनाए गए महिला और पुरुष छात्रावासों में पिछले कई वर्षों से छात्रों की संख्या कम होने के कारण बड़ी संख्या में भवन खाली पड़े हैं. उपयोग नहीं होने से इनमें से कई छात्रावास जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं. उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार प्रदेश में 331 एडेड और 200 राजकीय डिग्री कॉलेज संचालित हैं. इनमें करीब 50 कॉलेज ऐसे हैं जहां छात्रावास लंबे समय से खाली पड़े हुए हैं. इन भवनों के रखरखाव पर खर्च होने के बावजूद उनका उपयोग नहीं हो पा रहा था.

रोजगारपरक पाठ्यक्रमों पर रहेगा फोकस

उच्च शिक्षा विभाग ने सभी कॉलेज प्राचार्यों को निर्देश दिए हैं कि वे खाली पड़े छात्रावासों का उपयोग विद्यार्थियों की जरूरत और वर्तमान रोजगार बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए करें. इन भवनों में ऐसे कोर्स शुरू किए जाएंगे जो छात्रों को रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान कर सकें. विभाग की अनुमति मिलने के बाद कॉलेज नए कौशल आधारित और रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू कर सकेंगे. इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए आधुनिक पुस्तकालय और प्रयोगशालाओं का भी विस्तार किया जाएगा.


प्रधानाचार्य परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉक्टर अनिल मिश्रा ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय छात्रों के हित में है. हालांकि उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार छात्रावासों की मरम्मत और नवीनीकरण के लिए विशेष बजट उपलब्ध कराए तो इसका लाभ और अधिक बढ़ सकता है. उन्होंने बताया कि कानपुर के पीपीएन कॉलेज और देवरिया के बाबा राघव दास कॉलेज सहित कई संस्थानों के छात्रावास लंबे समय से खाली पड़े हैं. ऐसे भवनों का शैक्षणिक उपयोग छात्रों और संस्थानों दोनों के लिए फायदेमंद होगा.

साइबर सुरक्षा में करियर बनाने का नया अवसर

इसी बीच तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में भी एक बड़ा कदम उठाया गया है. आईआईटी कानपुर अब साइबर सुरक्षा के विशेषज्ञ तैयार करने के लिए नया बैचलर डिग्री कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है. इस कोर्स का नाम बैचलर ऑफ साइबर सिक्योरिटी रखा गया है. डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराध, ऑनलाइन धोखाधड़ी और हैकिंग की घटनाओं को देखते हुए साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ रही है. इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह विशेष कार्यक्रम तैयार किया गया है.

इस चार वर्षीय कोर्स की सबसे खास बात इसकी अनोखी प्रवेश प्रक्रिया है. इसमें दाखिला पारंपरिक इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों की तरह केवल जेईई एडवांस्ड रैंक के आधार पर नहीं मिलेगा. उम्मीदवारों का चयन जेईई मेंस स्कोर, साइबर सुरक्षा क्षेत्र में किए गए कार्यों, लिखित परीक्षा और हैकाथॉन के प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा. शॉर्टलिस्ट किए गए छात्रों को आईआईटी कानपुर परिसर में आयोजित विशेष परीक्षा और हैकाथॉन में भाग लेना होगा. सफल उम्मीदवारों को ही प्रवेश का अवसर मिलेगा.