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हरिद्वार-नजीबाबाद मार्ग पर भीषण सड़क हादसा, मां-बेटे समेत 3 की मौत; कई घायल

हरिद्वार-नजीबाबाद मार्ग पर पिकअप और रोडवेज बस की भिडंत में बढापुर निवासी मां-बेटे समेत तीन लोगों की मौत हो गई. तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हैं. घटना से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है.

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Kanhaiya Kumar Jha

बिजनौर: बिजनौर के बढापुर कस्बे में उस समय मातम पसर गया जब हरिद्वार-नजीबाबाद मार्ग पर हुए एक भीषण सडक हादसे में मां-बेटे समेत तीन लोगों की जान चली गई. हादसे की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और पूरे कस्बे में शोक की लहर दौड गई.

जानकारी के अनुसार बढापुर के मोहल्ला गडरियान निवासी शराफत अपने परिवार के साथ चंडीगढ में रहकर कपडों की धुलाई का काम करता है. वहीं मोहल्ले के फईम, वंश और नन्नु हिमाचल प्रदेश में रंगाई-पुताई का कार्य करते हैं. घर वापसी के दौरान फईम ने शराफत से संपर्क कर उनसे साथ चलने का अनुरोध किया था.

हिमाचल से लौटते समय साथ बैठे थे तीनों युवक

सोमवार सुबह शराफत अपने परिवार और घरेलू सामान के साथ एक किराए की महिंद्रा पिकअप गाडी से चंडीगढ से बढापुर लौट रहा था. रास्ते में उसने हिमाचल से लौट रहे फईम, वंश और नन्नु को भी अपने साथ बैठा लिया. सभी लोग अपने घर पहुंचने की उम्मीद में सफर कर रहे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था.


रोडवेज बस से टकराई पिकअप, तीन की मौके पर मौत

हरिद्वार-नजीबाबाद मार्ग पर ग्राम श्यामपुर कांगडी के पुल के पास पिकअप गाड़ी की सामने से आ रही उत्तराखंड रोडवेज बस से जोरदार भिडंत हो गई. टक्कर इतनी भीषण थी कि गाड़ी के परखच्चे उड गए.

हादसे में शराफत की पत्नी शबाना (35 वर्ष), बेटे अयान (18 वर्ष) और फईम अहमद (36 वर्ष) की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और राहगीरों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया.

गंभीर रूप से घायल हुए तीन लोग

हादसे में शराफत, नन्नु और वंश गंभीर रूप से घायल हो गए. शराफत की हालत नाजुक बताई जा रही है और उन्हें ऋषिकेश स्थित एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जबकि नन्नु और वंश का उपचार श्यामपुर के एक अस्पताल में चल रहा है. दुर्घटना के बाद पिकअप चालक मौके से फरार हो गया.

पीछे छूट गए मासूम बच्चों के सवाल

इस हादसे ने कई परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया है. अयान अपने पांच भाई-बहनों में सबसे बडा था और माता-पिता के साथ चंडीगढ में रह रहा था. परिवार के अन्य चार बच्चे अभी घर पर हैं. दूसरी ओर फईम के पांच छोटे बच्चे हैं, जिन्हें अभी यह भी नहीं मालूम कि उनके सिर से पिता का साया उठ चुका है.

सबसे मार्मिक स्थिति शराफत की है, जो अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है. उसे अब तक यह जानकारी नहीं दी गई है कि उसकी पत्नी और बेटा इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं.