अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की रकम चोरी करने के मामले में गिरफ्तार सभी 8 आरोपियों को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जिसके बाद न्यायालय ने उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया. इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच जारी है और पुलिस चोरी से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है.
इस मामले में जांच का दायरा लगातार बढता जा रहा है. मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियों ने राम मंदिर से जुडे पूर्व पदाधिकारियों चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव से भी पूछताछ की. अधिकारियों ने तीनों के बयान दर्ज किए और मामले से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी जुटाई. पूछताछ के बाद चंपत राय दिल्ली रवाना हो गए.
चढावा चोरी प्रकरण अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है. अधिवक्ता अनूप अवस्थी द्वारा मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई की अपील की गई थी. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया. अदालत ने टिप्पणी करते हुए पूछा कि मामले में इतनी जल्दबाजी किस बात की है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अवकाश समाप्त होने के बाद ही याचिका पर विचार किया जाएगा.
मामले की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस ने आर्थिक पहलुओं की जांच भी तेज कर दी है. सोमवार सुबह पुलिस टीम अयोध्या धाम स्थित भारतीय स्टेट बैंक शाखा पहुंची. जानकारी के अनुसार गिरफ्तार आठ आरोपियों में से सात के खाते इसी शाखा में संचालित हैं.
पुलिस ने बैंक से खातों का विवरण और लेन-देन से संबंधित दस्तावेज प्राप्त किए हैं. जांच अधिकारी अब यह पता लगाने का प्रयास करेंगे कि मंदिर में नियुक्ति मिलने के बाद आरोपियों के खातों में कितनी राशि जमा हुई और उसका स्रोत क्या था. इस सिलसिले में बैंक के दो कर्मचारियों को भी नोटिस जारी किया गया है.
मामले को लेकर अयोध्या के अधिवक्ताओं में भी भारी नाराजगी देखने को मिली. स्थानीय वकीलों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि चढावा चोरी के आरोपियों की पैरवी कोई भी वकील नहीं करेगा.
बैठक में यह मांग भी उठाई गई कि चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा अयोध्या छोडें. अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो व्यापक स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा.