उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश और राजस्थान में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) अभियान ने उन महिलाओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जिन्होंने अपने प्रेमी से शादी करने के लिए परिवार छोड़ दिया था. ये महिलाएं अब मतदाता गणना फॉर्म भरने के लिए जरूरी दस्तावेज जुटाने में बुरी तरह फंस गई हैं, क्योंकि मायके वाले उनसे संबंध तोड़ चुके हैं और कोई जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं. BLO घर-घर दस्तक दे रहे हैं, लेकिन कई महिलाओं के लिए यह प्रक्रिया तनाव और असहायता का कारण बन गई है.
कानपुर के चमनगंज में एक मुस्लिम युवती ने प्रेम प्रसंग के कारण अपने परिवार से रिश्ता तोड़ दिया था और हमीरपुर के युवक से शादी कर ली. सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन जैसे ही SIR प्रक्रिया शुरू हुई, उसकी मुश्किलें भी बढ़ गईं. अब उसे अपने पिता की पहचान और पुराने पहचान पत्र की जानकारी देनी है, लेकिन परिवार से बात तक नहीं हो पा रही. नतीजतन, गणना फॉर्म फिलहाल अधूरा रह गया है. BLO ने उसे अगली बार दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कहा है, लेकिन युवती के सामने ये एक बड़ी चुनौती है.
दूसरा मामला कानपुर के किदवई नगर का है. यहां एक युवक को नोएडा में नौकरी करते हुए राजस्थान की एक युवती से प्यार हो गया. लड़का शादी के लिए राजी था और उसका परिवार भी सहमत था, लेकिन लड़की के घरवालों ने शादी को नकार दिया. लड़की भागकर कानपुर आ गई और शादी कर ली, लेकिन अब वही लड़की SIR प्रक्रिया में फंस गई है. गणना फार्म भरने के लिए पिता का नाम और 2003 की वोटर लिस्ट से पहचान की जानकारी जरूरी थी. इसलिए लड़की ने मजबूरी में पड़ोसियों से संपर्क कर जानकारी जुटाने की कोशिश की.
उदयपुर के राहुल और वंदना का मामला भी कुछ अलग नहीं. वंदना ने प्रेम विवाह के बाद मायके वालों से संबंध तोड़ दिए. लेकिन जैसे ही गणना फॉर्म भरने की बात आई, उसे अपने पहचान संबंधी दस्तावेज की आवश्यकता पड़ी. उसने मायके वालों से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने मदद करने से मना कर दिया. इसके बाद पति राहुल के आग्रह पर दोनों ने अपने उपलब्ध दस्तावेज के आधार पर गणना फॉर्म जमा किया.
ऐसे कई मामलों से यह साफ है कि प्रेम विवाह करने वाली महिलाएं आज SIR प्रक्रिया में सबसे ज्यादा परेशान हैं. जिन्होंने परिवार छोड़कर नया जीवन शुरू किया था, वे अब सरकारी दस्तावेजों के लिए मायके पर निर्भर हैं. कई महिलाओं के माता-पिता का निधन हो चुका है, कुछ अपने पतियों से अलग रहती हैं और कुछ के पास परिवार का बूथ नंबर या पहचान संख्या भी नहीं है. इस वजह से वे मतदाता सूची में अपना नाम जोड़ने या सुधार करने में बड़ी बाधाओं का सामना कर रही हैं.
इन सबके कारण महिलाओं को अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जबकि परिवार और प्रशासन दोनों की ओर से उन्हें पर्याप्त मदद नहीं मिल रही. यह स्थिति बताती है कि प्रेम विवाह के बाद नई जिंदगी शुरू करने वाली कई महिलाएं अब सरकारी प्रक्रियाओं की गंभीर जटिलताओं से जूझ रही हैं.
उदयपुर की जिला कलेक्टर मित मेहता का कहना है कि SIR प्रक्रिया के प्रारंभिक चरण में किसी भी मतदाता को पहचान संबंधी दस्तावेज देने की आवश्यकता नहीं होती. मतदाता सिर्फ गणना फॉर्म ऑनलाइन या ऑफलाइन भरकर जमा कर दें. बाद में यदि दस्तावेज की जरूरत होगी, तो प्रशासन मदद करेगा.
उदयपुर की वरिष्ठ अधिवक्ता रागिनी शर्मा ने कहा कि प्रेम विवाह करने वाली महिलाएं मुश्किल में हैं, इसलिए पुलिस और प्रशासन को ऐसे माता-पिता की काउंसलिंग करनी चाहिए जो दस्तावेज देने से मना कर रहे हैं. यदि परिवार फिर भी सहयोग नहीं करे, तो महिला अपने दस्तावेज खुद जुटा सकती है और जरूरत पड़ने पर एफआईआर भी दर्ज करा सकती है.
बदायूं के एसडीएम मोहित कुमार ने बताया कि चुनाव आयोग की वेबसाइट पर सभी मतदाताओं का डेटा उपलब्ध है. वहां परिजन की EPIC ID आसानी से देखी जा सकती है. अगर फिर भी जानकारी न मिले, तो गणना प्रपत्र का तीसरा विकल्प चुनकर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है.