लखनऊ: आजकल युवाओं और महिलाओं में विटामिन B12 की कमी एक बड़ी समस्या बन गई है. किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के अध्ययन में पाया गया है कि विटामिन B12 की कमी एनीमिया, थकान, झुनझुनी, मानसिक समस्याओं और पाचन संबंधी परेशानियों का कारण बन सकती है. यह अध्ययन इंडियन जर्नल ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन एंड हेमेटोलॉजी में प्रकाशित हुआ है.
KGMU के सर्जरी विभाग के प्रमुख और प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि सितंबर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच हेमेटोलॉजी विभाग की ओपीडी में आए 100 मरीजों पर इस विषय में अध्ययन किया गया. सभी मरीज एनीमिया और विटामिन B12 की कमी से पीड़ित थे. उनके CBC, आयरन, फोलेट, लिवर-किडनी फंक्शन, सोडियम, पोटेशियम और ब्लड शुगर की जांच की गई.
अध्ययन में यह सामने आया कि 22.58% महिलाओं और 20.29% पुरुषों में विटामिन B12 की गंभीर कमी पाई गई. वहीं, 51.61% महिलाओं और 40.58% पुरुषों में कमी सामान्य स्तर पर थी. उम्र के अनुसार देखा जाए तो 40 साल तक की उम्र वाले 42.62% लोगों में गंभीर कमी थी, जबकि इससे अधिक उम्र वाले केवल 20.69% में ही गंभीर कमी पाई गई. 20 साल से कम उम्र वालों में यह कमी 40% पाई गई.
डॉ. सिंह ने कहा कि शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में विटामिन, मिनरल, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फाइबर की जरूरत होती है. ज्यादातर पोषक तत्व हमें भोजन से ही मिलते हैं. विटामिन B12 स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन कई भारतीय लोग अपनी दिनचर्या और खानपान के कारण इसका पर्याप्त सेवन नहीं कर पाते हैं.
विटामिन B12 की कमी पूरी करने के लिए कलेजी, शेलफिश, मछली, लाल मांस, टूना और सैलमन मछली, अंडा, दही, चीज़ और बादाम का दूध जैसे आहार शामिल करने चाहिए. इसके अलावा केला, संतरा और मौसमी फल भी विटामिन B12 और अन्य पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत हैं. फल और सब्जियों में मौजूद फाइबर और पोटेशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने, कब्ज और अल्सर जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करते हैं.
विटामिन B12 की कमी से एनीमिया हो सकता है. एनीमिया तब होता है, जब शरीर में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बन पाती. लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में विटामिन B12 की अहम भूमिका होती है. इसके अलावा, यह मस्तिष्क के सही कामकाज और डीएनए संश्लेषण के लिए भी जरूरी है. शरीर विटामिन B12 खुद नहीं बना सकता, इसलिए यह भोजन से ही लेना जरूरी है.
मनुष्य के शरीर में विटामिन B12 का सामान्य स्तर 160-950 पिकोग्राम प्रति मिलीलीटर माना जाता है.300 पिकोग्राम प्रति मिलीलीटर होने पर इसे सामान्य, 200 से 300 के बीच सीमा रेखा और 200 पिकोग्राम प्रति मिलीलीटर से कम होने पर इसकी कमी मानी जाती है. कमी के लक्षणों में थकान, कमजोरी, पीली त्वचा, सिरदर्द, चक्कर, सांस लेने में दिक्कत, भूख कम होना, हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन, भूलने की समस्या, जीभ में दर्द और मुंह के छाले शामिल हैं.
इसके अलावा आंखों की रोशनी में बदलाव, चिड़चिड़ापन, अवसाद और चलने-फिरने में असामान्यताएं भी विटामिन B12 की कमी के संकेत हो सकते हैं. हालांकि, हाथ-पैरों में चुभन का मतलब हमेशा कमी नहीं होता है. यह कई अन्य कारणों से भी हो सकता है, जैसे नसों का दबना, डायबिटीज, हाइपरथायरायडिज्म आदि. इसलिए टेस्ट कराना आवश्यक है.
विटामिन B12 की कमी को मानव निर्मित साइनोकोबालामिन (cyanocobalamin) के माध्यम से ठीक किया जा सकता है. कमी की गंभीरता और कारण के आधार पर इलाज कुछ समय के लिए या जीवन भर जारी रह सकता है. इसके अलावा संतुलित आहार लेना बेहद जरूरी है, जिसमें हरी सब्जियां, मौसमी फल, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट शामिल हों. शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए पोषणयुक्त भोजन और समय-समय पर जांच कराना जरूरी है. विटामिन B12 की कमी को नजरअंदाज करना गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।