संगम की रेत पर खुले अनोखे बैंक में खाता खुलवाने पर नहीं लगता एक भी रुपया, राम नाम की पूंजी होती है जमा

प्रयागराज माघ मेला 2026 में संगम की रेती पर एक अनोखा 'राम नाम बैंक' श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना है, जहां धन नहीं बल्कि राम नाम लिखी कॉपियां भक्ति की पूंजी मानी जाती हैं.

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Kuldeep Sharma

प्रयागराज का माघ मेला सिर्फ स्नान और साधना तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां आस्था के अनोखे रूप भी देखने को मिलते हैं. संगम की रेती पर बसा अस्थायी नगर इस बार एक अलग वजह से चर्चा में है. यहां एक ऐसा बैंक है, जहां न कैश काउंटर है, न पासबुक में बैलेंस है. इस बैंक में श्रद्धालु अपने हाथों से लिखे ‘राम’ नाम को जमा कर आध्यात्मिक संपत्ति जोड़ते हैं.

संगम की रेती पर अनोखा बैंक

माघ मेला क्षेत्र में बना 'राम नाम बैंक' किसी सामान्य बैंक जैसा नहीं दिखता. यहां न लेन-देन होता है और न ही रुपये-पैसे की बात. श्रद्धालु लाल स्याही से लिखी राम नाम की कॉपियां जमा करते हैं. देश के कोने-कोने से ही नहीं, विदेशों से भी भक्त यहां आते हैं. रेती पर बने इस बैंक में शांति, अनुशासन और भक्ति का माहौल हर किसी को आकर्षित करता है.

आस्था से जुड़ा संचालन

इस बैंक का संचालन ज्योतिषाचार्य आशुतोष करते हैं, जो वर्षों से इसकी सेवा में लगे हैं. उनके अनुसार, यह बैंक श्रद्धा और विश्वास की नींव पर टिका हुआ है. यहां आने वाले कई भक्त अपने जीवन के अनुभव साझा करते हैं. डॉ. अशोक तिवारी जैसे श्रद्धालुओं का मानना है कि राम नाम लेखन से उन्हें गंभीर बीमारियों से उबरने में मानसिक और आत्मिक शक्ति मिली.

इस बैंक में कैसे खोलें खाता

राम नाम बैंक में खाता खोलना बेहद आसान है. इसके लिए न तो किसी तरह का पहचान पत्र चाहिए और न कोई शुल्क. ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से इस बैंक में खाता खोला जा सकता है. खाताधारकों को सात्विक जीवन अपनाना होता है. मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूरी जरूरी है. खाता खुलने पर 32 पन्नों की कॉपी दी जाती है, जिसमें हर पन्ने पर 108 बार ‘राम’ नाम लाल पेन से लिखा जाता है.

मनोकामना और पुण्य की परंपरा

जो श्रद्धालु विशेष मनोकामना रखते हैं, वे सवा लाख राम नाम लिखने का संकल्प लेते हैं. वहीं पूरा होने पर ये कॉपियां लाल वस्त्र में बांधकर बैंक में जमा की जाती हैं. मान्यता है कि इससे पुण्य और मानसिक शांति मिलती है. माघ मेले के दौरान सबसे अधिक राम नाम लिखने वाले भक्तों को सम्मानित भी किया जाता है. यह परंपरा राम नाम बैंक को आस्था का जीवंत प्रतीक बनाती है.