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राम मंदिर चंदा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट पहुंचे निर्मोही अखाड़े ने की ये मांग

निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन, फोरेंसिक ऑडिट, मूल विग्रहों की पुनर्स्थापना और बेहतर प्रतिनिधित्व की मांग की है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
राम मंदिर चंदा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट पहुंचे निर्मोही अखाड़े ने की ये मांग
Courtesy: ANI

अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और ट्रस्ट के कामकाज से जुड़े विवाद ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है. निर्मोही अखाड़े ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग की है. याचिका में ट्रस्ट को सार्वजनिक धार्मिक न्यास के रूप में पुनर्गठित करने, उसके वित्तीय और संपत्ति संबंधी लेनदेन का फोरेंसिक ऑडिट कराने तथा मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपील की गई है.

मूल विग्रहों की पुनर्स्थापना की मांग

निर्मोही अखाड़े ने अपनी याचिका में वर्ष 1950 और 1982 से स्थापित मूल विग्रहों को पुनः गर्भगृह में स्थापित करने का अनुरोध भी किया है. अखाड़े का तर्क है कि नई मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा से मूल विवाद के स्वरूप में परिवर्तन हुआ, जो ट्रस्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर का विषय है. हालांकि, अखाड़े ने स्पष्ट किया है कि वह 2019 में अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती नहीं दे रहा, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन और जवाबदेही से जुड़े मुद्दे उठा रहा है.

ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्तमान ट्रस्ट सीमित सदस्यों वाला निकाय बनकर रह गया है, जहां पर्याप्त जवाबदेही नहीं है. हाल में राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और बहुमूल्य वस्तुओं के कथित गबन के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है. अखाड़े का कहना है कि जब इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है, तो ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन की स्वतंत्र फोरेंसिक जांच भी कराई जानी चाहिए.

प्रतिनिधित्व और पूजा व्यवस्था पर भी उठाए मुद्दे

निर्मोही अखाड़े ने दावा किया कि ट्रस्ट में उसके प्रतिनिधि का चयन परंपरागत प्रक्रिया के अनुरूप नहीं हुआ. याचिका में ट्रस्टियों की नियुक्ति के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाने, अखाड़े को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने और 2019 के फैसले के अनुपालन की समीक्षा के लिए स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है. साथ ही मंदिर में पूजा, सेवा और धार्मिक अनुष्ठान रामानंदी संप्रदाय की परंपरा के अनुसार कराने का भी अनुरोध किया गया है. मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने की संभावना है.