मथुरा के ‘मिनी जामताड़ा’ में 200 से ज्यादा पुलिसकर्मियों ने लिया साइबर ठगी पर बड़ा एक्शन, पांच घंटे चले सर्च ऑपरेशन में 45 गिरफ्तार
200 से ज्यादा पुलिसकर्मियों ने मथुरा के बॉर्डर इलाके जिसे मिनी जामताड़ा कहा जाता है, वहां छापा मारा और 45 लोगों को हिरासत में लिया. पुलिस को शक है कि यह एक ऑर्गनाइज्ड साइबर फ्रॉड नेटवर्क है.
मथुरा: पुलिस ने मथुरा के बॉर्डर इलाके, जिसे 'मिनी जामताड़ा' कहा जाता है, वहां साइबर फ्रॉड करने वालों के खिलाफ एक और बड़ा ऑपरेशन शुरू किया. रविवार सुबह करीब 6 बजे 200 से ज्यादा पुलिसकर्मियों ने 20 से ज्यादा गाड़ियों के काफिले के साथ शेरगढ़ इलाके के दो गांवों विशंभरा और जंगवाली में एक साथ छापेमारी की. इस छापेमारी के दौरान SP सुरेश चंद्र रावत खुद मौके पर मौजूद रहे और पूरे ऑपरेशन की कमान संभाली.
सुबह-सुबह गांव में पुलिस टीम के पहुंचने से अफरा-तफरी मच गई. कई लोग अपने घरों से भाग गए, जबकि कुछ ने खेतों और पगडंडियों पर छिपने की कोशिश की. पुलिस ने पूरे गांव को घेर लिया और भाग रहे संदिग्धों का पीछा किया. करीब पांच घंटे तक चले इस बड़े सर्च ऑपरेशन के दौरान 45 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया. इन सभी से शेरगढ़ पुलिस स्टेशन में पूछताछ की जा रही है.
पुलिस को क्या है शक?
पुलिस को शक है कि हिरासत में लिए गए युवक किसी ऑर्गनाइज्ड साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक रेड के दौरान कुछ लोग संदिग्ध रास्तों का इस्तेमाल करके राजस्थान बॉर्डर की तरफ भाग गए. अनुमान है कि 20 से ज्यादा साइबर फ्रॉड करने वाले पुलिस को चकमा देकर भाग गए.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल मथुरा बॉर्डर के पास के करीब 8 से 10 गांव लंबे समय से साइबर फ्रॉड के हॉटस्पॉट माने जाते रहे हैं. इन इलाकों से काम करने वाले गैंग देश-विदेश के लोगों को ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार बनाते रहे हैं. फ्रॉड कॉल सेंटर, बैंक अधिकारी बनकर, KYC अपडेट की आड़ में फ्रॉड करने और डिजिटल अरेस्ट से जुड़े फ्रॉड ट्रांजैक्शन की शिकायतें लगातार मिल रही हैं.
कैसे हुई इन गांवों की पहचान?
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पिछले कई महीनों से इस इलाके में साइबर क्राइम की शिकायतें बढ़ रही हैं. इन गांवों की पहचान टेक्निकल सर्विलांस और लोकल इनपुट के आधार पर की गई थी. रेड के दौरान कई मोबाइल फोन और बाइक भी बरामद हुए, जिनकी जांच की जा रही है. जब्त किए गए डिजिटल डिवाइस से एक बड़े नेटवर्क का पता चलने की उम्मीद है.
इससे पहले कब चलाया गया था सर्च ऑपरेशन?
गौरतलब है कि इससे पहले 11 दिसंबर 2025 को 400 पुलिस अधिकारियों ने इसी इलाके में करीब 12 घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाया था. उस ऑपरेशन के दौरान 42 संदिग्धों की पहचान हुई, जिनमें से 37 को गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बावजूद साइबर फ्रॉड नेटवर्क को पूरी तरह खत्म नहीं किया गया.
हिरासत में लिए गए युवकों से अच्छी तरह पूछताछ की जा रही है. अगर उनके किसी बड़े इंटरस्टेट या इंटरनेशनल साइबर गैंग से लिंक पाए जाते हैं, तो आगे की कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल, पूरे इलाके में पुलिस की सतर्कता बढ़ा दी गई है और फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी जारी है.
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