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ऑनलाइन गेम खेलने का लालच देकर 33 बच्चों से दरिंदगी, वीडियो रिकॉर्ड करके विदेश में बेची; कोर्ट ने पति-पत्नी को सुनाई फांसी की सजा

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में नरमी खतरनाक संदेश दे सकती है. अदालत के अनुसार, दोषियों के कृत्य में सुधार की कोई संभावना नहीं दिखती, इसलिए कठोरतम दंड ही न्याय का उचित मार्ग है.

Anuj
Edited By: Anuj
ऑनलाइन गेम खेलने का लालच देकर 33 बच्चों से दरिंदगी, वीडियो रिकॉर्ड करके विदेश में बेची; कोर्ट ने पति-पत्नी को सुनाई फांसी की सजा

बांदा: उत्तर प्रदेश में बांदा की विशेष पॉक्सो अदालत ने एक ऐसे मामले में फैसला सुनाया है, जिसने पूरे बुंदेलखंड को झकझोर दिया. अदालत ने राम भवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को 33 मासूम लड़कों के यौन शोषण, वीडियो बनाकर बेचने और धमकाने के अपराध में फांसी की सजा से दंडित किया है.

अदालत ने इसे समाज की नैतिकता पर हमला बताते हुए 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' यानी दुर्लभतम श्रेणी का अपराध माना. फैसला सुनाते समय अदालत ने कहा कि इतने व्यापक और योजनाबद्ध तरीके से बच्चों का शोषण मानवता के खिलाफ अपराध है.

न्यायालय ने क्या कहा?

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में नरमी खतरनाक संदेश दे सकती है. अदालत के अनुसार, दोषियों के कृत्य में सुधार की कोई संभावना नहीं दिखती, इसलिए कठोरतम दंड ही न्याय का उचित मार्ग है. यह टिप्पणी सुनते ही अदालत कक्ष में सन्नाटा छा गया.

ऑनलाइन गेम खेलने का लालच

जांच में सामने आया कि राम भवन, जो सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर रह चुका था, बच्चों को ऑनलाइन गेम खेलने का लालच देता था. कभी पैसे और तोहफों का प्रलोभन दिया जाता, तो कभी डर दिखाकर उन्हें चुप कराया जाता. किराए के मकान में उसकी पत्नी भी इस अपराध में सक्रिय भूमिका निभाती थी. दोनों मिलकर बच्चों का शारीरिक शोषण करते और वीडियो रिकॉर्ड करते थे.

डिजिटल साक्ष्य और CBI जांच

तलाशी के दौरान केंद्रीय एजेंसी ने उनके घर से आठ लाख रुपये नकद, 12 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, एक हार्ड डिस्क और छह पेन ड्राइव बरामद किए. फोरेंसिक जांच में बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री मिली. जांच एजेंसी के अनुसार, यह सामग्री एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म और डार्कनेट के जरिए देश और विदेश में बेची जाती थी. 2021 में आरोप पत्र दाखिल हुआ और मुकदमे में 74 गवाहों के बयान दर्ज किए गए.

पीड़ितों की पीड़ा

अदालत में पेश दस्तावेजों से पता चला कि कई बच्चों को गंभीर शारीरिक चोटें आई. कुछ बच्चों का इलाज जारी है.  कुछ बच्चों में आंखों की समस्या भी विकसित हुई. सबसे गहरी चोट मानसिक है, जिससे उबरने में समय लगेगा. बच्चों को लंबे समय तक धमकाकर रखा गया, जिससे वे डर और अपराधबोध में जीते रहे.

कोर्ट ने जारी किए निर्देश

अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि पीड़ितों के इलाज, काउंसलिंग और सुरक्षित भविष्य के लिए ठोस कदम उठाए जाएं. प्रत्येक पहचान किए गए पीड़ित परिवार को दस लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का आदेश भी दिया गया है.