आधी रात का ऑपरेशन, 59 बसें सीज! 'ऑपरेशन प्रहार' से बस माफियाओं में मचा हड़कंप

बरेली मंडल में अवैध बसों के खिलाफ चलाए गए ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत 81 बसों का चालान और 59 बसों को सीज किया गया. रातभर चली कार्रवाई से बस संचालकों में हड़कंप मच गया और परिवहन विभाग ने आगे भी अभियान जारी रखने की बात कही.

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Kuldeep Sharma

बरेली मंडल में बिना वैध परमिट और नियमों का उल्लंघन कर चल रही निजी बसों के खिलाफ परिवहन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की. ‘ऑपरेशन प्रहार’ नाम से चलाए गए इस विशेष अभियान में कई जिलों के अधिकारियों ने रातभर छापेमारी की. कार्रवाई के बाद अवैध बस संचालन पर प्रशासन ने सख्त रुख साफ कर दिया.

आधी रात तक चला ऑपरेशन प्रहार

शासन तक लगातार शिकायतें पहुंच रही थीं कि बरेली मंडल से दूसरे राज्यों तक कई निजी एसी बसें बिना वैध अनुमति या परमिट की शर्तों का उल्लंघन करते हुए संचालित हो रही हैं. इसी के बाद अपर परिवहन आयुक्त केडी सिंह गौर के नेतृत्व में विशेष अभियान शुरू किया गया. आठ सदस्यीय टीम ने आधी रात तक बरेली, बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर समेत पूरे मंडल में जांच अभियान चलाया. अधिकारियों ने बसों के दस्तावेजों की बारीकी से जांच की और नियमों का उल्लंघन मिलने पर मौके पर ही कार्रवाई की.

81 बसों का चालान, 59 वाहन सीज

अभियान के दौरान कुल 81 बसों का चालान किया गया, जबकि 59 बसों को सीज कर दिया गया. जांच के दौरान परमिट, पंजीकरण, फिटनेस प्रमाण-पत्र, टैक्स, बीमा, प्रदूषण प्रमाण-पत्र और राष्ट्रीय वाहन डेटाबेस से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन किया गया. जिन बसों में दस्तावेज अधूरे मिले या नियमों का उल्लंघन पाया गया, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई. इस कार्रवाई के बाद बस मालिकों और ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों में खलबली मच गई.


कई जिलों के अधिकारी रहे अभियान में शामिल

इस विशेष अभियान में गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, मुरादाबाद, अमरोहा, संभल, रामपुर और मुजफ्फरनगर सहित कई जिलों के परिवहन अधिकारी शामिल रहे. वहीं मंडल स्तर पर भी आरटीओ और एआरटीओ अधिकारियों ने अलग-अलग स्थानों पर चेकिंग अभियान चलाया. अधिकारियों की संयुक्त कार्रवाई के कारण कई बस संचालक अपने वाहन लेकर रास्ते बदलते या संचालन रोकते नजर आए.

आगे भी जारी रहेगा सख्त अभियान

परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन वाहनों में अनधिकृत संरचनात्मक बदलाव की शिकायत मिली है, उनका कार्यपालक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में तकनीकी परीक्षण कराया जाएगा. यदि जांच में नियमों का उल्लंघन साबित होता है तो फिटनेस, पंजीकरण, परमिट और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी. विभाग का कहना है कि अवैध बस संचालन रोकने के लिए ऐसे अभियान लगातार जारी रहेंगे और नियम तोड़ने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.