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हरियाणा का वेतन वृद्धि फैसला बना नोएडा में आग का कारण! हिंसक हुआ मजदूरों का आंदोलन

नोएडा में वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर मजदूरों का एक सप्ताह पुराना शांतिपूर्ण आंदोलन सोमवार को हिंसक हो गया. हरियाणा सरकार के 35 प्रतिशत वेतन वृद्धि फैसले ने नोएडा के मजदूरों को भी भड़का दिया. प्रदर्शनकारियों ने पथराव और वाहनों में आगजनी की, जिससे इलाके में तनाव फैल गया. 

ani
Kuldeep Sharma

नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों की वेतन बढ़ोतरी की मांग अब हिंसा में बदल गई है. एक सप्ताह से शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा प्रदर्शन सोमवार को अचानक उग्र रूप ले लिया. खासकर नोएडा फेज-2 के होजरी कॉम्प्लेक्स और सेक्टर 83 में सैकड़ों मजदूर सड़कों पर उतर आए. पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े, फिर भी बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. हरियाणा सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी में 35 प्रतिशत बढ़ोतरी का फैसला नोएडा के मजदूरों के लिए चिंगारी बन गया है. इस घटना ने प्रशासन और उद्योगपतियों दोनों को चिंता में डाल दिया है. 

हरियाणा का फैसला बना चिंगारी

हरियाणा सरकार ने एक अप्रैल को न्यूनतम मजदूरी में करीब 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी का ऐलान किया था, जिसकी अधिसूचना 11 अप्रैल से लागू हो गई. अकुशल मजदूरों का मासिक वेतन 11,275 रुपये से बढ़कर 15,220 रुपये, अर्धकुशल का 12,430 से 16,780 रुपये और कुशल मजदूरों का वेतन भी काफी बढ़ा दिया गया. इसी फैसले के बाद नोएडा में काम करने वाले मजदूरों ने भी समान वेतन वृद्धि की मांग उठानी शुरू कर दी. उनका कहना है कि जब एक ही कंपनी हरियाणा में ज्यादा वेतन दे रही है तो नोएडा में भेदभाव क्यों? नोएडा एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन मल्हान ने भी माना कि हरियाणा का यह कदम नोएडा के आंदोलन की मुख्य वजह बना है

हिंसा का उग्र रूप

सोमवार सुबह जैसे ही फैक्टरियां खुलीं, मजदूरों ने काम बंद कर दिया. खासकर रिचा ग्लोबल कंपनी के बाहर स्थिति सबसे ज्यादा बिगड़ी. प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी, कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया और यातायात पूरी तरह ठप हो गया. मदरसन कंपनी के आसपास भी हंगामा हुआ. पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़कर स्थिति नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन आक्रोश कम नहीं हुआ. मजदूरों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन उनकी मांगों को टाल रहा है. रिचा ग्लोबल की फरीदाबाद यूनिट में वेतन बढ़ोतरी के बाद नोएडा की चार यूनिटों के मजदूर भी समान सुविधा चाहते हैं.

मजदूरों की मुख्य मांगें

मजदूरों की प्रमुख मांग है कि न्यूनतम मासिक वेतन 20,000 रुपये किया जाए. इसके अलावा 30 नवंबर तक बोनस बैंक खाते में जमा हो, किसी भी कर्मचारी को बिना वजह न निकाला जाए, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान हो और रविवार को काम कराने पर डबल पेमेंट मिले. एक मजदूर रमेश कुमार ने बताया कि जब हरियाणा में काम करने वाले कर्मचारियों को ज्यादा सैलरी मिल रही है तो नोएडा में कम क्यों? उन्होंने कहा कि कंपनी के जीएम और एचआर से बात करने पर भी कोई ठोस जवाब नहीं मिल रहा है. इस वजह से गुस्सा बढ़ता जा रहा है.

शासन की चुनौती

नोएडा फेज-2 में फैला यह आंदोलन अब एक कंपनी तक सीमित नहीं रहा है. आसपास की कई एक्सपोर्ट कंपनियों में भी मजदूर सड़क पर आ गए हैं. श्रम आयुक्त समेत वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और कंपनी प्रबंधन से बातचीत कर रहे हैं. प्रशासन का कहना है कि मजदूरों की जायज मांगों पर विचार किया जाएगा, लेकिन हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी. पुलिस ने इलाके में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है. उद्योगपति चाहते हैं कि बातचीत से जल्द समाधान निकले, वरना नोएडा का यह औद्योगिक हब पूरी तरह प्रभावित हो सकता है.