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संभल विवाद में नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद-कुएं का संबंध नकारा

जामा मस्जिद के निर्माण का दावा है कि यह हरि मंदिर नामक एक प्राचीन मंदिर को नष्ट करके स्थापित की गई थी, जिससे विभिन्न समुदायों के बीच धार्मिक स्थलों को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है.

Ritu Sharma
Edited By: Ritu Sharma
संभल विवाद में नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद-कुएं का संबंध नकारा
Courtesy: Social Media

Sambhal Dispute: उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि संभल की जामा मस्जिद के पास स्थित विवादित कुआं किसी भी धार्मिक स्थल का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक भूमि पर स्थित है. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कुआं ऐतिहासिक रूप से सभी समुदायों के लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा है.

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पेश की रिपोर्ट

आपको बता दें कि राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत में दायर स्थिति रिपोर्ट में बताया कि यह कुआं, जिसे स्थानीय रूप से 'धरणी वराह कूप' कहा जाता है, मस्जिद की चारदीवारी के अंदर नहीं, बल्कि उसके बाहर स्थित है. रिपोर्ट में कहा गया कि ''यह कुआं मस्जिद के अंदर नहीं है और न ही इसका जामा मस्जिद से कोई संबंध है.'' बता दें कि सरकार ने यह भी दावा किया कि मस्जिद प्रबंधन समिति ने अदालत के सामने भ्रामक तस्वीरें पेश की हैं, जिससे ऐसा लगता है कि कुआं मस्जिद परिसर के अंदर स्थित है. लेकिन वास्तविक निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि कुएं का मस्जिद से कोई सीधा संबंध नहीं है.

क्या है विवाद?

संभल की शाही जामा मस्जिद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है. दावा किया जाता है कि यह मस्जिद हरि मंदिर नामक प्राचीन मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी, जिससे समुदायों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है. वहीं मस्जिद प्रबंधन समिति का कहना है कि विवादित कुआं मस्जिद की सीमा पर स्थित है और मस्जिद के लिए इसका पानी इस्तेमाल किया जाता रहा है. वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि यह कुआं सार्वजनिक संपत्ति है और इसे हर समुदाय के लोग उपयोग करते रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट का दखल और नगर पालिका का नोटिस

बताते चले कि सुप्रीम कोर्ट ने 10 जनवरी, 2024 को मस्जिद के पास स्थित इस कुएं को लेकर संभल नगर पालिका द्वारा जारी नोटिस पर रोक लगा दी थी. मस्जिद प्रबंधन समिति का आरोप था कि नगर पालिका ने सार्वजनिक पोस्टर लगाकर इसे "हरि मंदिर के कोने में स्थित" बताया और दावा किया कि यहां पूजा शुरू की जाएगी. इस पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा था, जिसके जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कुआं न तो किसी धार्मिक स्थल का हिस्सा है और न ही इसका उपयोग किसी विशेष समुदाय के लिए आरक्षित है.

साथ ही सरकार ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि यह कुआं प्राचीन काल से सभी समुदायों के लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा है. हालांकि, 1978 के सांप्रदायिक दंगों के बाद कुएं के एक हिस्से पर पुलिस चौकी बना दी गई थी, जबकि दूसरा हिस्सा तब तक उपयोग में रहा. इसके अलावा, 2012 में इसे पूरी तरह ढक दिया गया और अब इसमें पानी नहीं है. राज्य सरकार ने बताया कि संभल जिले में ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण 19 कुओं के संरक्षण और जीर्णोद्धार की योजना बनाई गई है, जिसमें से यह कुआं भी एक है. 14 कुओं के संरक्षण कार्य के लिए 123.65 लाख रुपये की योजना प्रस्तावित है.

आगे क्या होगा?

बहराहल, संभल की जामा मस्जिद और विवादित कुएं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई जारी है. मस्जिद प्रबंधन समिति ने सरकार की स्थिति रिपोर्ट पर विस्तृत प्रतिक्रिया दायर करने की बात कही है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट इस मामले में क्या निर्णय लेता है और क्या यह विवाद जल्द सुलझता है या आगे और गहराता है.