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मुजफ्फरनगर की फैक्ट्री में बंधुआ मजदूरी का पर्दाफाश, 13 मजदूरों को कराया गया मुक्त

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक टोट-बैग निर्माण फैक्ट्री से बंधुआ मजदूरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है. श्रम विभाग, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त छापेमारी में 13 मजदूरों को मुक्त कराया गया.

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Edited By: Shanu Sharma
मुजफ्फरनगर की फैक्ट्री में बंधुआ मजदूरी का पर्दाफाश, 13 मजदूरों को कराया गया मुक्त
Courtesy: AI

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले की एक टोट-बैग निर्माण फैक्ट्री में काम कर रहे 13 मजदूरों ने जो कहानी सुनाई, उसने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया. विभिन्न राज्यों और नेपाल से आए इन मजदूरों का आरोप है कि उन्हें बेहतर रोजगार, अच्छी सैलरी और सुरक्षित जीवन का भरोसा देकर फैक्ट्री में बुलाया गया था. हालांकि फैक्ट्री पहुंचने के बाद हालात पूरी तरह बदल गए. 

मजदूरों के अनुसार उनसे उनके मोबाइल फोन और आधार कार्ड छीन लिए गए, जिससे उनका अपने परिवारों से संपर्क टूट गया. इसके बाद उन्हें फैक्ट्री परिसर के भीतर ही सीमित कर दिया गया और बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई.

एक मजदूर की हिम्मत से खुला राज

पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एक मजदूर किसी तरह फैक्ट्री से भागने में सफल हो गया. उसने पुलिस तक पहुंचकर अधिकारियों को फैक्ट्री के भीतर चल रही कथित बंधुआ मजदूरी और प्रताड़ना की जानकारी दी. सूचना मिलते ही श्रम विभाग, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने फैक्ट्री पर छापा मारा. कार्रवाई के दौरान 13 मजदूरों को वहां से मुक्त कराया गया. इनमें हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और नेपाल से आए श्रमिक शामिल थे.

मजदूरों ने लगाए गंभीर आरोप

मुक्त कराए गए मजदूरों ने अधिकारियों के सामने गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि उन्हें नियमित वेतन देने का वादा किया गया था, लेकिन उन्हें कोई भुगतान नहीं किया गया. मजदूरों ने दावा किया कि उन्हें बेहद सीमित मात्रा में भोजन दिया जाता था और कई बार 24 घंटे में केवल एक बार सूखी रोटी खाने को मिलती थी. मजदूरों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति विरोध करता या भागने की कोशिश करता, तो उसके साथ मारपीट की जाती थी.

पुलिस ने छापेमारी के दौरान लाठियां और अन्य सामान भी बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल कथित रूप से मजदूरों को डराने और पीटने के लिए किया जाता था. मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि फैक्ट्री परिसर में दो पिटबुल कुत्ते रखे गए थे. उनका कहना है कि इन कुत्तों का इस्तेमाल उन्हें भयभीत करने और भागने से रोकने के लिए किया जाता था.

पुलिस ने शुरू की जांच

अधिकारियों के अनुसार मजदूरों के बयानों और मेडिकल परीक्षण के आधार पर मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है. छापेमारी के दौरान पुलिस ने शिवम त्यागी और प्रदीप बालियान नामक दो लोगों को गिरफ्तार किया है. दोनों से पूछताछ की जा रही है और फैक्ट्री के संचालन से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है.